प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा

सरायपाली. ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर ग्राम सिंघोड़ा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यह अंचल का एक सक्रिय स्वास्थ्य केन्द्र है, जहाँ प्रतिदिन कई मरीज इलाज के आते हैं। लेकिन वहाँ पदस्थ स्टाफ में से भी अधिकांश किसी न किसी सर्वे में केन्द्र से बाहर रहते हैं, जिसके कारण मरीजों को वहाँ समुचित इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। साथ ही अन्य कई प्रकार के सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे यहाँ इलाज के लिए आने वाले मरीजों सहित वहाँ के स्टाफ को भी परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनके आस-पास ही स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके, इसके लिए शासन के द्वारा ब्लॉक में विभिन्न स्थानों पर प्राथमिक स्वास्थ्य केद्र खोले गए हैं
लेकिन कई स्थानों पर सुविधाओं का अभाव है, तो कहीं स्टाफ की ही कमी है, जिसके कारण क्षेत्र वासियों को उन सेंटरों का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे जगह स्वास्थ्य केन्द्र होने के बावजूद लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर आना पड़ता है। कुछ इसी तरह का मामला ग्राम सिंघोड़ा में भी देखा जा रहा है, जहाँ हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर तो है, लेकिन वहाँ स्टाफ की काफी कमी है। यहां स्टाफ नर्स, ड्रेसर, टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद भी रिक्त हैं। वर्तमान में यहाँ एक डॉक्टर, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, चौकीदार, नेत्र सहायक तथा एलएचबी पदस्थ हैं, जो अधिकतर टीकाकरण के लिए बाहर सर्वे में रहते हैं। यह सेंटर पूरे क्षेत्र का एक सक्रिय केन्द्र है, जहां पर प्रतिदिन 30-50 मरीज आते हैं एवं प्रतिमाह 10 से अधिक डिलीवरी भी करवायी जाती है। स्टाफ की कमी के कारण यहाँ ओपीडी का काम वार्ड बाय, स्वीपर चौकीदार करते हैं.
हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नेत्र सहायक न होने के कारण सिंघोड़ा में पदस्थ नेत्र सहायक को ही दोनों स्थानों का कार्य देखना पड़ रहा है। जिससे वे तीन दिन सिंघोड़ा, तो तीन दिन सरायपाली में सेवाएँ देती हैं। इससे एक ओर जहाँ मरीजों को परेशानी हो रही है, वहीं नेत्र सहायक को भी बार-बार आने जाने में परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत आते हैं कई गाँव
ज्ञात हो कि सिंघोड़ा का स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र के कई ग्रामों के लिए एकमात्र स्वास्थ्य केन्द्र है, जहाँ ग्राम रूढ़ा, बटकी, जमदलखा, साहसपानी, कस्तूराबहाल, खैराडीपा, बांजीबहाल, कलेण्डा, मंजूरपाली, जगदीशपुर, पंड़कीपाली, बागद्वारी, मानपाली, पुटका, देबरीगढ़, पलसाभाड़ी, लखनपुर, रिमजी, कुर्मीपाली, जोगीदादर, भगत सरायपाली, दर्रीपाली, सुखापाली आदि कई ग्रामों के मरीज प्रतिदिन यहाँ इलाज के लिए आते हैं। लेकिन स्वास्थ्य केन्द्र में स्टाफ की कमी के कारण आने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। लैब टैक्नीशियन न होने पर इलाज हो रहा है प्रभावित अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का कई बार इलाज से पहले बीपी, शुगर, एचबी, प्रेग्नेंसी आदि कई प्रकार के टेस्ट करने होते हैं।
हैं। लेकिन लैब टैक्नीशियन नहीं होने के कारण मरीजों की जाँच नहीं हो पाती और उन्हें बिना इलाज के लिए ही वापस जाना पड़ता है। इसके बाद वे इलाज के लिए या तो 25 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरायपाली जाते हैं, या फिर उन्हें निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती
पहुँच मार्ग व पानी की भी है समस्या
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की दूरी मुख्य मार्ग से 500 मीटर है, लेकिन यह मार्ग बडे-बडेÞ गड्ढों से भरा हुआ है। समतल मार्ग न होने के कारण लोगों को मजबूरीवश यहीं से स्वास्थ्य केन्द्र में जाना पड़ता है। साथ ही इस क्षेत्र में 20-25 परिवारों का भी निवास है, जिन्हें प्रतिदिन इसी मार्ग से आना जाना पड़ता है। इसके अलावा यहाँ इलाज के लिए प्रतिदिन लगभग 50 मरीज आते हैं, जिनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी होते हैं। मार्ग खराब होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य केन्द्र तक आने में भी परेशानी होती है। वहीं वर्तमान में स्वास्थ्य केन्द्र में पानी की भी समस्या है। यहाँ बोरेवेल तो है, लेकिन पानी नहीं निकलने के कारण यहाँ पदस्थ कर्मचारियों को करीब आधा किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। पानी की कमी होने से वर्तमान में यहाँ डिलीवरी के मामले प्रभावित हो रहे हं । उक्त समस्याओं को देखते हुए क्षेत्रवासियों के द्वारा अतिशीघ्र इनके समाधान की मांग की जा रही है, ताकि वे स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।























