छत्तीसगढ़

अंचल के 43 विद्यार्थियों ने इंटेक के आॅनलाइन प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

सरायपाली (काकाखबरीलाल  ) .    डिजीटल प्लेटफार्म पर आठें कन्हैया  विषय पर ऑनलाइन – चित्रकला एवं निबंध – प्रतियोगिता दिनांक 24-09-2020 को आयोजित किया गया जिसमें मुख्य वक्ता-सामाजिक कार्यकर्ता, समाज चिंतक,लेखक डॉ परिवेश मिश्र जी,इन्टैक के आजीवन सदस्य,संसदीय सचिव छ.ग.शासन एवं विधायक महासमुंद श्री विनोद सेवनलाल चंद्राकर जी,इन्टैक छत्तीसगढ़ अध्याय के सहसंयोजक एवं सचिव श्री राजेन्द्र चांडक जी,डॉ गोरेलाल चंदेल जी,डॉ नत्थू तोड़े जी,इन्टैक महासमुंद अध्याय के संयोजक श्री दाऊलाल चंद्राकर जी, सहसंयोजक श्री राजेश्वर खरे जी, इन्टैक रायपुर अध्याय के संयोजक श्री भावे जी,इन्टैक मेंबर श्री शशि शर्मा जी,श्री अशोक शर्मा जी,श्री प्रमोद कन्नौजे जी, मुख्य तकनिकी सहयोगी काजल शर्मा जी,इन्टैक के आजीवन सदस्य श्री यशवंत कुमार चौधरी एवं इन्टैक के  पदाधिकारीगण /इन्टैक के  मेम्बर्स, प्रतिभागी विधार्थी एवं उनके मार्गदर्शक शिक्षक – शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दी | इस प्रतियोगिता के माध्यम से 119प्रतिभागी विद्यार्थी लाभान्वित हुए जिसमें विकासखंड सरायपाली से 43 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता किया| कार्यक्रम में इन्टैक के आजीवन सदस्य,संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन एवं विधायक महासमुंद श्री विनोद सेवनलाल चंद्राकर जी ने संस्कृति -परंपरा के उत्थान – संरक्षण के लिए इन्टैक के कार्यों /कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि जन्माष्टमी को छ.ग.में आठें कन्हैया के रूप में मनाया जाता है,छ.ग.की लोक परम्परा व संस्कृति को ध्यान में रखकर बच्चों के बीच इस विषय पर चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन करना इन्टैक का सराहनीय पहल है |   मुख्य वक्ता सामाजिक कार्यकर्ता, समाज चिंतक, लेखक डॉ परिवेश मिश्र जी ने कहा कि सीखना- सिखाना एक सतत प्रक्रिया है,कला के साथ बहुत सारी चीजें  जुड़ी रहती हैं अतः जीवन में कला -परंपरा के महत्व को समझकर इसे संरक्षित रखना जरूरी है और इन्टैक अध्याय इसके लिए काफी प्रयासरत हैं| क्लास रूम के बाहर की शिक्षा देने में इन्टैक संस्था अग्रणी है|
इन्टैक महासमुन्द अध्याय के संयोजक श्री दाऊलाल चंद्राकर जी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि इस आयोजन से बच्चों में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा – संस्कृति को सहेजने- संरक्षित करने की भावना प्रबल होगी |     इन्टैक छत्तीसगढ़ अध्याय के सहसंयोजक एवं सचिव श्री राजेन्द्र चाण्डक जी ने बच्चों को कला परम्परा -संस्कृति की सीख देते हुए जीवन में इसके प्रभाव को स्पष्ट किया तथा इन्हें संरक्षित करने की जरुरत पर बल दिया |    . महासमुंद अध्याय के सह- संयोजक श्री राजेश्वर खरे ने इस आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए लुप्त होती संस्कृति के  संरक्षण कि दिशा में इस कार्यक्रम को एक अभिनव पहल बताया | डॉ. गोरेलाल चंदेल जी ने कहा कि आठें कन्हैया छत्तीसगढ़ का एक बड़ा लोकपर्व है,नई पीढ़ी को इस लोक परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता है| समाज से जुड़ने के लिए कला -संस्कृति-परम्परा से जुड़ा रहना आवश्यक है | लोक कलाएं समूह की शक्ति को जागृत करती हैं और सामाजिक – सामूहिक शक्ति से ही हम समाज विरोधी तत्वों/कार्यो पर अंकुश लगाने में सक्षम हो सकते हैं | श्रीकृष्ण हमारे सामूहिकता / सामाजिकता के प्रतीक हैं जो समाज विरोधी तत्वों से सामाजिक शक्ति के साथ लड़ने की प्रेरणा देते हैं | उन्होंने कहा कि इस आयोजन से बच्चों में परम्पराओं -संस्कृतियों के प्रति लगाव बढेगा और सामाजिक चेतना – न्याय की भावना प्रबल होगी |   डॉ नत्थू तोड़े जी ने प्राकृतिक रंगों से चित्रकारी को महत्वपूर्ण बताते हुए बच्चों के समक्ष चित्र उकेर कर इसकी विशेषताओं से अवगत कराया एवं प्राकृतिक रंगों के महत्व पर प्रकाश डाला |
प्रतियोगिता सम्पन्न कराने में  इन्टैक के लाइफ मेम्बर श्री यशवंत कुमार चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण रही | आमंत्रित वक्ताओं,इन्टैक मेम्बर्स, समस्त प्रतिभागी बच्चों,उनके मार्गदर्शक शिक्षक – शिक्षिकाओं, पालकों सहित कार्यक्रम को सफल बनाने में जिन्होंने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग किया उनके प्रति इन्टैक के आजीवन सदस्य यशवंत कुमार चौधरी ने आभार व्यक्त किया |
श्रावण मास कृष्ण पक्ष को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ अंचल में घरों के दीवारों में आठें कन्हैंया बनाने का रिवाज़ है जिसमें द्वापर के युगपुरुष श्रीकृष्ण जन्म उल्लास का वर्णन होता है|     संभवतः यह छत्तीसगढ़ का प्रथम भित्ति चित्र (वाल आर्ट )है | इस कला को ग्रामीण अंचल में आज भी देखा जा सकता है |हमारे पूर्वजों ने अपने भाव व्यक्त करने के लिए पर्व के आधार पर चित्रकला को अपनाया वह था – आठें कन्हैया | प्रकृति का प्रतीकात्मक चित्रण आठें कन्हैया में दृष्टिगोचर होता है |इस दीवार कला में लोक जीवन के स्वप्न,आकांक्षा, सामाजिकता और सौंदर्य की अभिव्यक्ति होती है |आंचलिक परंपरा,परिवेश और संस्कृति के आधार पर आठें कन्हैया चित्र ने विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं पर दस्तक देकर जनमानस तक  अपना सन्देश पहुँचाया है | इस चित्र को घरों के अंदर दीवार पर दो -तीन फीट ऊंचाई पर भृंगराज,गेरू, चावल के माँढ़ आदि प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है | इस प्रतियोगिता में सरायपाली विकासखंड के शास. उच्च प्राथ.शाला लांती से कु. पुजा साहु,कु.मुस्कान साहु नीरज दास,जयप्रकाश साहू,शास. हाईस्कूल केंदुढार से कु.दुर्गेश्वरी साहू, कु.रजनी बाघ,कु.कुसुम साहू,कु.लाची पटेल,थमलेश पटेल,धनेश्वर साहू सेंट स्टीफेन्स माडल स्कूल सरायपाली से कु.समर्पिता विश्वास,शा.उ.प्रा.शा. बालसी से कु.झरना नंदे,कु.झरना प्रधान,मा.स. गो.मं.HSS स्कूल सरायपाली से कु.लीली नंदे, शा.उ.प्रा.शा.पैकिन से कु.रजनी साहू,कु.करिश्मा साहू,कु.नीतूकर,कु.संध्या,कु.सुभिक्षा,कु.सीमा पटेल, कु.अर्चना,शास.उ.प्रा.शा.बोईरमाल से कु.राजश्री साहू,कु.भूमिका पटेल,कु.दीपांजली,कु.सृष्टी, ओमप्रकाश,शा.उ.प्रा.शा.खपरीडीह से कु.अंजली ओगरे,कु.सपना साहू,कु.प्राची साहू,सेंट विसेंट पैलोटी स्कूल कुटेला से कु.लक्ष्मी बुड़ेक,शा.मा.स.गो.म.इं.मि. मिडिल स्कूल सरायपाली से कु.स्वलेहा खातून,सैयद अयान, कु.स्वलेहा पाणिग्राही,अनम खान,कु.गुंजन सेठ कु.नैना अग्रवाल,नियांश बारिक,कु.पूनम साहू,चिराग दुबे,केन्द्रीय विद्यालय सरायपाली से कु.दिशा पटेल, शा.उ.प्रा.शाला पाटसेंद्री से कु. वर्षा पटेल,एकलव्य इंग्लिश मीडियम स्कूल अर्जुंडा शौर्य तिवारी,कु.अमीषा पटेल ने प्रतिभागिता कर आठें कन्हैया की अष्टकोणीय पेंटिंग ड्राइंगशीट  बनाई और रुल्ड शीट पर  200शब्दों में सारगर्भित निबंध लिखकर अपनी कला- कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और इसे फोटो खींचकर व्हाट्सप्प के माध्यम से निर्धारित समय में भेजा  | ज्ञात हो कि इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को इन्टैक द्वारा प्रमाण पत्र दिए जाएंगे तथा परीक्षण उपरांत प्रथम,द्वितीय, तृतीय व पांच सांत्वना विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा साथ ही चयनित तीन उत्तम प्रविष्टियों को इन्टैक मुख्यालय नई दिल्ली भेजा जाएगा |  कार्यक्रम में बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने में सरायपाली विकासखंड के श्री यशवंत कुमार चौधरी (शिक्षक) शास.उच्च प्राथ.शाला लांती, श्रीमती लक्ष्मी नायक (शिक्षिका) शास.उच्च प्राथ.शाला खपरीडीह,श्रीमती शीला विश्वास (सहा.शि.) शास. हाई स्कूल केंदुढार,श्रीमती उषा पटेल(शिक्षिका) शास.उच्च प्राथ.शाला पैकिन,वंदना सतपथी (शिक्षिका) शास.उच्च प्राथ.शाला बालसी,श्रीमती संगीता पंडा (शिक्षिका) मा.स.गो.मंदिर शास.इंग्लिश मीडियम मिडिल स्कूल सरायपाली,श्रीमती पुष्पांजली चौधरी (सहा.शि.)शा. नवीन प्रा.शाला शास्त्रीनगर,श्री कान्हू बूड़ेक (व्याख्याता) शास. हाईस्कूल कनकेबा, श्री देवेश कुमार भोई (शिक्षक)शास.उच्च प्राथ.शाला बोईरमाल,श्री सत्यमस्वरूप पटेल (शिक्षक)शास.उच्च प्राथ.शाला लांती,श्री चंद्रशेखर पटेल(सहा.शि.)शा. प्रा.शाला पाटसेन्द्री,श्री संदीप तिवारी(सहा.शि.)शा. प्रा.शाला रेंहटीखोल ने अपनी सक्रिय सहयोग दिया ! सभी प्रतिभागी बच्चों एवं मार्गदर्शनकर्ता टीचर्स को जिला शिक्षा अधिकारी- महासमुन्द श्री राबर्ट मिंज जी एवं सहायक संचालक एवं जिला मिशनसमन्वयक श्री सतीश नायर जी,सहायक संचालक श्री हिमांशु भारतीय जी, बीईओ सरायपाली श्री आई.पी. कश्यप एवं बीआरसीसी श्री भोजराज पटेल एवं एबीईओ श्री डी.एन. दीवान,तकनीकी के जानकार शिक्षक श्री डी.एन.राणा आदि ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की है

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छत्तरसिंग पटेल

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