आर्ट के लिए लाखों की नौकरी छोड़कर होम डेकोर स्टार्टअप शुरू किया अब लाखो की हो रही आमदनी

बचपन से मेरा इंटरेस्ट आर्ट और क्रिएटिविटी की तरफ रहा है, लेकिन मेरी कई कोशिशों के बावजूद मैं इस फील्ड में न तो पढ़ाई कर पाई ना ही इसमें अपना करियर बना सकी। ये बात अलग है कि मैं अपने फ्री टाइम में घर में पेंटिंग या क्राफ्ट मेकिंग करती रहती थी। तब मैं भारती एयरटेल की ओडिशा और पश्चिम बंगाल की हेड हुआ करती थी। किसी कारण मुझे रघुराजपुर के पट्टचित्र कलाकारों से मिलना हुआ। उस मुलाकात के बाद मुझे लगा हम पढ़-लिखकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन अपनी संस्कृति के लिए कुछ खास नहीं कर पाते न ही अपने ट्रेडिशन को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं।” ये कहना है भुवनेश्वर की अर्पिता साहू का।
ओडिशा की लोक कला को इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचने और इस काम को करने वाले कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए अर्पिता ने लाखों की नौकरी छोड़ शुरू किया ‘विंटेज विस्तारा’ (VintageVistara) नाम से होम डेकोर का स्टार्टअप। जिसके जरिए करीब 20 से ज्यादा कलाकारों को रोजगार दिया। देश ही नहीं विदेश में ही अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री कर रही हैं और अब इनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपए का है।
विंटेज विस्तारा हैंड-पेंटेड या हैंड-मेड होम डेकोर, यानी घर सजाने के सामान का स्टार्टअप है। इसकी खासियत ये है कि ये ऐसे प्रोडक्ट तैयार करता है जो घर सजाने के साथ डेली लाइफ में इस्तेमाल भी होते हैं। ये प्रोडक्ट्स ट्रैडीशनल आर्ट फॉर्म और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन मिश्रण है।
अर्पिता बताती हैं, “पट्टचित्र ओडिशा की काफी पुरानी और ट्रैडीशनल कला है जिसके इस्तेमाल से हम फंक्शनल होम डेकोर बनाते हैं। ऐसी चीजें जो दिखने में सुन्दर और डेकोरेटिव तो होती ही हैं, साथ ही उन्हें इस्तेमाल भी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर आप वॉल क्लॉक ले लीजिए, अब हर किसी को अपने घर में वॉल क्लॉक की जरूरत तो होती ही है। अगर ये वॉल क्लॉक को आर्टिस्टिक फॉर्म में तैयार किया जाए तो लोगों को काफी पसंद आता है। हम इसी तरह की कई चीजें बनाते हैं। हमारे पास करीब 200 प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें टी पॉट्स, स्टोरेज कैनिस्टर, टेबल लैंप, वॉल प्लेट, बुल हेड और कई तरह की साड़ियां भी शामिल हैं।”
इन सभी प्रोडक्ट्स पर ओडिशा का पट्टचित्र, बिहार की मधुबनी सहित कई जगह की ट्रैडीशनल पेंटिंग्स बनी होती हैं। जो काफी आकर्षक होती हैं और जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में होता है।
34 साल की अर्पिता साहू ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई SOA यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर और फिर MBA की पढ़ाई जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर से की है। वो कोका-कोला और कोलगेट-पामोलिव जैसे कई कॉर्पोरेशन के साथ काम करने के बाद भारती एयरटेल की ओडिशा और पश्चिम बंगाल की HR हेड भी रही हैं।
अर्पिता बताती हैं, “मेरा इंटरेस्ट हमेशा क्रिएटिव फील्ड में ही रहा है। इतना कि मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई से पहले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग (NIFD) और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइनिंग (NID) के लिए फॉर्म भी भरा था, लेकिन किसी वजह से मेरा करियर अलग ही डायरेक्शन में बढ़ता गया। MBA की पढ़ाई पूरी होने से पहले ही मुझे कोको कोला से ऑफर मिल गया। तो इस तरह मैं मैनेजमेंट फील्ड में आगे बढ़ती गई, लेकिन मुझे एक तरह की कमी खलती रही।
जब मुझे ये बिजनेस का आइडिया आया तब मुझे लगा कि मैं यहां अपने पैशन को फॉलो तो करूंगी ही, साथ ही साथ मैं अपने मैनजमेंट स्किल से बिजनेस को भी बड़े लेवल पर ले जाऊंगी। हां, ये HR के काम से बिल्कुल अलग था, लेकिन मुझे लगता है कि कोई भी बिजनेस लोगों को मैनेज करने का ही होता है।”
भारती एयरटेल में काम करने के दौरान अर्पिता का ओडिशा के रघुराजपुर गांव जाना हुआ। ये गांव सदियों से हेरिटेज क्राफ्ट्स विलेज की तरह मशहूर है। वहां के कलाकारों से मिलने के बाद अर्पिता ने नौकरी छोड़ खुद का बिजनेस करने का मन बनाया।
स्टार्टअप को शुरू करने के पीछे कारण पूछने पर अर्पिता कहती हैं, “एक बार किसी काम से रघुराजपुर गई थी। वहां से मैं कुछ पेंटिंग खरीद कर लाई, जिनकी फोटो विदेश में रहने वालों दोस्तों को भेजी तो उन्हें भी बहुत पसंद आया। दोस्तों का कहना था कि चादर या कपड़े पर बनी ये पेंटिंग्स सुंदर तो बहुत हैं, लेकिन कपड़े पर बने होने के कारण इन्हें दीवारों पर नहीं लगाया जा सकता। उनकी बातों से मुझे लगा कि अगर इस ट्रैडीशनल आर्ट को कॉन्टेम्परेरी टच के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए तो ये उन्हें ज्यादा पसंद आएगा। इस तरह मुझे होम डेकोर के स्टार्टअप का आइडिया आया।”
2019 में मैंने अपनी नौकरी छोड़ ‘विंटेज विस्तारा’ नाम से कंपनी की शुरुआत की थी। वाल क्लॉक पर पहला आइडिया आजमाया था। जिसकी डिजाइन लोगों को काफी पसंद आई, काफी सराहना मिली और फिर उनका काम आगे बढ़ता गया।
अर्पिता कहती हैं, “हमारे सेटअप में काम करने वाले सभी कलाकार की कई पीढ़ियां इसी काम से जुड़ी हैं। इसलिए वह इस काम को बहुत ही बेहतरीन तरीके से करते हैं। मुझे इस बात की खुशी मिलती रहती है कि मैं बिजनेस करने के अलावा इन लोगों के लिए कुछ कर पा रही हूं। इनका काम भी इतना अच्छा है कि लोगों को हमारे प्रोडक्ट्स काफी पसंद आ रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, हैदराबाद , तेलंगाना और असम सहित हमारे कस्टमर पूरे देश में हैं। ज्यादातर कस्टमर रिपीटेड ऑर्डर देते हैं। इसके अलावा हमारे कस्टमर अमेरिका और ब्रिटेन में भी हैं, जो बल्क में ऑर्डर करते हैं।”
अर्पिता आगे बताती हैं कि प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश लकड़ी और फाइबरबोर्ड (एमडीएफ) UP के सहारनपुर से मंगाई जाती है। कारीगरों की एक टीम प्रोडक्ट के अनुसार इन लकड़ियों को शेप देती है। वहीं बुल हेड को केरल में तैयार कराया जाता है। मेटल प्रोडक्ट्स पश्चिम बंगाल और घड़ियां दिल्ली से आते हैं। ये सभी ओडिशा में ही पेंटिंग कर तैयार की जाती हैं।
अर्पिता की कंपनी टाटा, बिरला और फर्न एंड पेटल्स के साथ भी जुड़ी है। इसके अलावा वो Etsy के माध्यम से दुनिया भर में शिपिंग करती हैं। इन सभी जगहों से उन्हें हर महीने करीब 500 ऑर्डर मिलते हैं। पिछले एक साल में उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 लाख रुपए रहा है।
अर्पिता एक अच्छी कंपनी पर अच्छे पद पर काम कर रही थीं, जहां उनकी सैलरी भी बहुत अच्छी थी। इस तरह एक अच्छे जॉब को छोड़ किसी काम को जीरो से शुरू करना कितना मुश्किल था, पूछने पर उनका कहना है, “एयरटेल में मेरी लाखों की सैलरी थी, लेकिन मेरा मन इस काम में पूरी तरह लग गया था। तो जॉब छोड़ना तो मुश्किल था ही, लेकिन मैंने कंपनी को अलविदा बोलने से पहले अपने बिजनेस का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिए था। मुझे विश्वास था कि मैं इस काम में जल्द से जल्द कामयाब हो जाऊंगी। हालांकि, शुरुआत में ये इतना आसान नहीं था।
सबसे बड़ी चुनौती थी छोटे स्टोर में हैंडमेड प्रोडक्ट्स तैयार करना। इन प्रोडक्ट्स को आराम से ही बनाया जा सकता है, क्योंकि हमारे पास कई तरह के लिमिटेशंस होते हैं। शुरू के दिनों में कस्टमर बनाना भी एक बड़ा चैलेंज होता है। इन सभी हालत के बावजूद मैं और मेरी टीम बिना रुके काम करते रहे। शायद यही वजह है कि कम समय में हमने दुनिया भर में अपने कस्टमर बना लिए हैं।”
अर्पिता के अनुसार वो आने वाले समय में अपना काम और बढ़ाना चाहती हैं। तीन साल में वो अपनी इनकम को तीन गुना ज्यादा देखती हैं। इस बात से वो संतुष्ट है कि अपने राज्य-देश की ट्रैडीशनल कला को पूरी दुनिया में प्रेजेंट कर पा रही हैं। खत्म हो रही कला को उनकी एक पहल के कारण फिर से पंख लग गए हैं।

























