छत्तीसगढ़

जिले में दर्जनों स्कूल ऐसे जहाँ खुले आसमान के नीचे होती है पढ़ाई

कहीं जर्जर स्कूल में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं तो कहीं पेड़ की छांव के नीचे. कहीं आंगनबाड़ी भवन में ही स्कूल लग रहा है तो कहीं शिक्षक ही लापरवाही का नमूना पेश कर रहे हैं. जी हाँ शिक्षा विभाग में बदहाली का आलम उस सम्भाग से है जहाँ से शिक्षा मंत्री खुद आते हैं. कैसे बदहाल और जर्जर स्थिति में है बलरामपुर जिले का शासकीय स्कूल पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्राथमिक शाला सावित्रीपुर में बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने मजबूर हैं. बलरामपुर के सावित्रीपुर का ये एकलौता स्कूल नहीं जहां स्कूल भवन जर्जर और बदहाल हो, बल्कि सिहार के प्राथमिक शाला का भवन भी जर्जर होने की वजह से कक्षाएं प्रधान पाठक कक्ष और अतिरिक्त कक्ष में लगाई जा रही हैं.

पर अफ़सोस बच्चों की दर्ज संख्या के आधार पर अतिरिक्त कक्ष और प्रधान पाठक कक्ष का दो कमरा भी यहां बौना साबित हो रहा है. बदहाली का आलम यहीं खत्म नहीं होता मड़वा व सेरंगदाग में आलम इससे भी खराब है. यहां स्कूल का छत टूट-टूट कर गिरता है और इसी वजह से शिक्षक यहां बाहर कक्षाएं लगाने को मजबूर हैं. कई बार तो मौसम खराब होने की वजह से बच्चों के स्कूल की छुट्टी कर दी जाती है.

 

वैसे यह बात और है कि महीनों से बलरामपुर के कई स्कूलों की स्थिति जर्जर है. जिला शिक्षा अधिकारी महोदय 5 तारीख तक जर्जर स्कूलों की सूची राज्य सरकार को भेजकर मरम्मत का पूरा आश्वासन दे रहे हैं. वहीं जहां अतिरिक्त कक्ष छोटे पड़ रहे हैं वहां और भी अतिरिक्त कक्ष बनवाने की भी वे दलील दे रहे हैं.

वैसे तस्वीरें खुद ब खुद हाल बयां कर रही हैं की शिक्षा मंत्री के संभाग में किस तरह से बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं. ऐसी पढ़ाई से सरकारी खानापूर्ति तो की जा सकती है मगर नौनिहालों के भविष्य के गढ़ने की कहानी बेईमानी होगी. दूसरी तरफ जिला शिक्षा अधिकारी जो व्यवस्था सुधारने की बात कह रहे हैं, उन्हें खुद नहीं पता कि जिले में जर्जर स्कूलों की एग्जैक्ट संख्या क्या है.

 

 

AD#1

काका खबरीलाल

हर खबर पर काकाखबरीलाल की पैनी नजर.. जिले के न. 01 न्यूज़ पॉर्टल में विज्ञापन के लिए आज ही संपर्क करें.. kakakhabarilaal@gmail.com

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!