सरायपाली

सरायपाली: बच्चों ने खेत को बनाया क्रिकेट मैदान

सरायपाली (काकाखबरीलाल).एक तो भागम भाग भरी जिंदगी में इंसान के लिए खेलने का समय ही नहीं है। इन व्यस्तताओं के बीच थोड़ा-बहुत समय यदि निकाल भी लिया जाए तो खेल के लिए स्थान नहीं बचे हैं।

खेल न खेलने की वजह से घर के भीतर ही इंसान सिमट कर रह गया है। इस समय अंचल में ठंड ने जोर पकड़ लिया है इसके साथ ही छोटे छोटे बच्चे ठंड दूर करने मैदान के अभाव में खेत को ही क्रिकेट ग्राउंड बना लिए है। बच्चों को प्रतिदिन खेत में क्रिकेट खेलते देखा जा सकता है।

बच्चों ने बताया कि शारीरिक ब्यायाम के साथ ही मनोरंजन भी हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों के अभाव में प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती।

खेल इंसान की जन्मजात प्रवृति है। बच्चा जन्म के कुछ महीने बाद से ही माता-पिता के साथ खेलने लगता है। बड़ा होने पर अपने भाई-बहनों के अलावा मित्रों के साथ खेलने को आतुर रहता है। इसके बाद खिलौने उसके साथी बन जाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इंसान के शौक भी बदल जाते हैं। कबड्डी, लुका-छुपी, गुल्ली-डंडा, दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, बॉलीबाल की लज्जत से कौन वाकिफ नहीं है। क्रिकेट में तो जैसे बच्चों की जान बसी है। गांव व शहर के गली मुहल्ले में बच्चे क्रिकेट का बल्ला थामे नजर आते हैं। बच्चे हो या बड़े, खेल सभी को पसंद हैं, लेकिन बढ़ती आबादी के चलते गांव के खेत-खलियान सिमट कर रह गए हैं। गांवों में खलियान की भूमि पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जे कर लिए, जो स्थान बचे हैं तो उनका ग्रामीण कूड़ा डालने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। इससे बच्चों के खेलने के लिए गांवों में मैदान नहीं बचे हैं। अब ऐसे में बच्चे खेलें तो कहां।

ग्रामीण क्षेत्रों में मैदान के अभाव में खेत-खिलहानों बनाया जा रहा मैदान

क्रिकेट खेलने के लिए मैदान नहीं होने की वजह से कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों सहित खिलाड़ी भी खेतों को मैदान बनाकर क्रिकेट खेलते तथा प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही है। उनकी सफलता की कहानी इन्हीं गली-मोहल्लों से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव होता है। गांवों में खेल के मैदान न होने से बच्चे और बड़े यदा-कदा खेत और खलियानों में खेलते देखे जा सकते हैं।

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काका खबरीलाल

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