निजी हॉस्पिटल ने पैसे के आभाव में मरीज को कोरोना संदिग्ध बताकर इलाज से किया मना, मौत

रायपुर(काकाखबरीलाल)। प्रदेश का पूरा स्वास्थ्य महकमा एक तरफ जहां 24 घंटे कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में जुटा हुआ है, वही दूसरी तरफ एक निजी अस्पताल की अमानवीयता सामने आई है। राजधानी के राजातालाब स्थित एक निजी हॉस्पिटल ने पैसे के अभाव में मरीज की बिना जांच के कोरोना संदिग्ध बताकर इलाज करने से मना कर दिया। इलाज के अभाव में पीडि़त की बुधवार की सुबह मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीआरएम ऑफिस के सामने आरवीएच निवासी रविन्द्र सिंह की सोमवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
परिजन उन्हें तुरंत लेकर खमतराई स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने रविन्द्र को देखने के बाद निजी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। देर रात परिजन किसी तरफ हॉस्पिटल पहुंचे। यहां पर डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। मंगलवार शाम तक इलाज में 40 हजार खर्च होने के बाद भी रविन्द्र की स्थिति में कोई सुधार नही हुआ। आर्थिक रूप से कमजोर परिजन इलाज में ज्यादा राशि खर्च होता देखकर परेशान होने लगे।
रविन्द्र के बेटे ने बताया कि डॉक्टर वह दवा भी मंगा रहे थे, जिसकी कोई जरूरत नही थी। आर्थिक स्थिति खराब होता देखकर अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, टेस्ट कराना पड़ेगा। किसी सरकारी अस्पताल में लेकर जाइए। अस्पताल में ही टेस्ट करने की बात पर डॉक्टर ने बताया कि सैंपल बाहर भेजे जाते हैं, दो-तीन दिन लग जाएंगे। वही, एक डॉक्टर निमोनिया बता रहे थे।
रविन्द्र के बेटे ने बताया कि अपने पिता को लेकर देर रात लेकर आंबेडकर अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में डॉक्टर लेने से इनकार कर रहे थे। काफी हाथ-पैर जोडऩे के बाद किसी तरह भर्ती किया गया। बुधवार की सुबह उनकी मौत हो गई। आंबेडकर अस्पताल में भी कोरोना टेस्ट नही किया गया। बेटे ने कहा कि एक निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर कोरोना संदिग्ध बता रहे थे लेकिन किसी कागज या पर्ची पर इसका उल्लेख नहीं है।
अस्पताल संचालक ने नही दिया जवाब
एक निजी हॉस्पिटल के संचालक से इस मामले में पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर 3 से 4 बार कॉल किया गया लेकिन उन्होंने रिसीव नही किया। मैसेज व वाट्सअप भी किया गया, लेकिन कोई रिस्पॉस नही दिया।


























