अब पशुओं के भी बनेंगे ये आईडी कार्ड, नस्ल की शुद्धता की भी होगी पहचान

काकाखबरीलाल 07/01/18
पशुपालन विभाग में जल्दी ही एक नई योजना को अमलीजापा पहनाने की तैयारी की जा रही है। इसके अंतर्गत जिलेभर में पशुओं के लिए यूनिक आईडी वाले कार्ड बनाए जाएंगे। मवेशियों के खो जाने या चोरी चले जाने पर तत्काल उनका पता इस यूनिक आईडी कार्ड से लगाया जा सकेगा।
मवेशीयों के खो जाने या चोरी चले जाने पर तत्काल उनका पता इस यूनिक आईडी कार्ड से लगाया जा सकेगा
पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक के मुताबिक केंद्र द्वारा संजीवनी योजना की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत पशुओं की यूनिक आईडी बनाए जाएंगे। इसमें १२ अंकों का एक बार कोड होगा। इसमें पशु की संपूर्ण जानकारी होगी। चिकित्सालय में कृत्रिम गर्भाधान और अन्य किसी कारण से लाए गए पशुओं की जानकारी तथा गाय व भैंस की नस्ल, उम्र, रंग, बछड़े के मालिक का नाम आदि बातों की जानकारी फीड कर वह टैग पशुओं के कान पर लगाया जाएगा। टैग पशुओं की सुविधा के अनुसार बनाया गया है। यह आसानी से निकलेगा भी नहीं। विभाग के अनुसार उक्त संजीवनी योजना में डाटा अपलोड का कार्य इनफार्मेशन नेटवर्क फार एनिमाल प्रोडक्शन एण्ड हेल्थ सॉफ्टवेयर पर किया जाएगा।
योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान करने के समय पहले गौरवंश या भैसवंश के पहले नर व मादा का पता चल सकेगा, साथ ही नस्ल की शुद्धता का भी पता लग पाएगा। पुलिस विभाग के अनुसार वर्ष 2015 में पशु परीक्षण अधिनियम के तहत 12 मामले दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार 2016 में 21 एवं 2017 में 13 मामले दर्ज है। करीब 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिले में आए दिन पशु तस्करी का मामला सामने आता है। ओडिशा के तस्कर सैकड़ों मवेशियों को हकालते हुए ओडिशा ले गए हैं। अब कार्ड बनने के बाद मवेशी के मालिक सहित पूरी जानकारी एक ही क्लिक में सामने आ जाएगी।
एक क्लिक पर मिलेगी जानकारी
गाय, भैंस आदि का यूनिक आईडी बनने के बाद पशु की पहचान कभी भी कोई भी व्यक्ति कर सकेगा। पशु खरीदने, बेचने के दौरान भी उसके और मालिक के बारे में जानकारी एक क्लिक पर सामने आ जाएगी। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में बीमारी फैल रही है, तो उस स्थान से पशुओं को हटाना आसान होगा। यदि किसी पशुधन की दुर्घटना होगी तो पशु पर लगे कान के टैग से उसके मालिक की पहचान भी की जा सकती है। ज्ञात हो कि जिले में करीब 1 लाख से अधिक दुधारू गौ व भैंस वंश हंै।
तस्करी पर लगेगी लगाम
पशुधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संजीवनी योजना के क्रियान्वयन से पशुओं का कार्ड बनने के बाद शेष पशुओं की जानकारी आसान से जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसके बाद लावारिश पशुओं को गौशाला में छोड़ा जाएगा। वहीं मालिकों का पता लगाकर उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा पशु मालिक का नाम, पता होने पर मवेशी खरीदी में संदेह की संभावना नहीं रह जाएगी। आईडी कार्ड बनाने के लिए पशुपालन विभाग जुट गया है।
योजना प्रस्तावित है
केंद्र शासन की संजीवनी आधार कार्ड योजना जिले में जल्द ही शुरू किया जाना प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत पशुओं के यूनिक कार्ड बनाए जाएंगे। योजना का क्रियान्वयन जल्द शुरू होगा।
धर्मदास झरिया, उप संचालक पशु चिकित्सा महासमुंद

























