नई तकनीक से दी जा रही शिक्षा से आदिवासी अंचलों में मिल रहे सुखद परिणाम…

रायपुर (काकाखबरीलाल)। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि राज्य के दूरस्थ आदिवासी अंचलों में नई तकनीक के जरिए दी जा रही शिक्षा के बेहतर परिणाम मिलना शुरू हो गए हैं। इन अंचलों में विद्यार्थियों की समझ और जानकारी बढ़ी है, यह प्रदेश के लिए सुखद तथा गर्व का विषय है। राज्य स्तरीय आंकलन के डाटा विश्लेषण और दीक्षा एप के जरिए बच्चों के शिक्षण कार्य में बेहतर कार्य करने वाले जिला शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों, प्रधान पाठकों और शिक्षकों को राज्य शिक्षण एवं प्रशिक्षण परिषद कार्यालय में आयोजित समारोह में प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि दीक्षा एप के जरिए शिक्षण की नई तकनीक राज्य में शुरू हुई है, इसके तहत कक्षा 1 से 10 तक की पाठ्यपुस्तकों में अतिरिक्त शिक्षण सामग्री के क्यू.आर. कोड लगाए गए हैं। यह कार्य पूरे राज्य में स्थानीय बोलियों में भी करना है, ताकि वहां के बच्चे स्थानीय भाषा, बोली में रूचि के अनरूप शिक्षा ग्रहण कर सकें। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय आंकलन से तैयार डाटा के विश्लेषण से आगे की कमियों को दूर करने में कामयाब होंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी, संचालक लोक शिक्षण श्री एस. प्रकाश, संचालक राज्य शिक्षण एवं प्रशिक्षण परिषद श्री पी.दयानंद विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में सुश्री जे.सी. कोरियन द्वारा तैयार कक्षा 6वीं से 8वीं तक की हिन्दी और अंग्रेजी विषय की सरल भाषा में सचित्र डिक्सनरी का विमोचन भी किया गया।
स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की सोच है कि शिक्षा से ही राज्य और देश आगे बढ़ेगा। शिक्षा में नई तकनीक लोगों की समझ में आए इसका हमें और प्रसार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी को शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी और कार्यक्रम में सम्मानित होने वाले सभी प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में कार्य कर रहे सभी प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षकों को सीखने-सीखाने के अवसर प्राप्त हुए हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग लगातार कार्य कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कार मिलना चाहिए। डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य स्तरीय आंकलन में पहली बार कक्षा पहली से 8वीं तक के लगभग 30 लाख बच्चों की एक साथ परीक्षा आयोजित करने का काम हुआ है। इस प्रयास में शिक्षा विभाग ने एक टीम भावना के साथ काम किया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी ने कहा कि राज्य स्तरीय आंकलन और दीक्षा राज्य में अभी शिशु अवस्था में है और पहले चरण में चलना शुरू किया है। देश के किसी भी राज्य में राज्य स्तरीय आंकलन का प्रयास पहली बार किया गया है आज हम ऐसे मुकाम पर पहुंच पाएं है कि हम शिक्षा की गुणवत्ता की बात कर सकें। आंकलन के माध्यम से खोज-खोज कर यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि हम कहां कमजोर हैं, वहां मेहनत की जाएं। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय आंकलन परीक्षा का आयोजन एक बड़ा निर्णय था। वार्षिक परीक्षा की संरचना व्यवस्थित प्रक्रिया से पूर्ण की गई। इस प्रक्रिया से जुड़े सभी साथियों ने दिन-रात मिलकर जो काम किया है वें सभी बधाई के पात्र है। श्री द्विवेदी ने कहा कि इस व्यवस्था में परिवर्तन की अनुमति, सहयोग और प्रोत्साहन स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र कैसे बनेगा, उसमें तकनीकी दल ने दिन-रात मेहनत की। विषय विशेषज्ञ और एस.सी.ई.आर.टी. के दल ने रिकार्ड समय में अच्छे तरीकें से काम किया। श्री द्विवेदी ने कहा कि आंकलन की जानकारी एकत्र कर एक टीम के रूप में और शैक्षणिक परफार्मेंस को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों ने पढ़कर क्या सीखा और जीवन में उसका कैसे उपयोग करेंगे, यहीं हमारी उपलब्धि होगी।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा कि आज का यह सम्मान अन्य सम्मानों से अलग है। यह डाटा के आधार पर व्यवस्था को जो अच्छा लगा उसके आधार पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मान के लिए चयन किया गया। यह पुरस्कार नई व्यवस्था के तहत दिया जा रहा है, जिसमें बिना किसी तैयारी से इस व्यवस्था में बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि दीक्षा एप केन्द्र की योजना है, यह राज्य में प्रारंभिक स्तर पर है। इसमें अतिरिक्त शिक्षण सामग्री को कैसे देखंे और उपयोग करें। कक्षा 10वीं तक सभी पुस्तकों में क्यू.आर. कोड डाला जा चुका है। वार्षिक कैलेण्डर के अनुसार इस साल के अंत तक शिक्षण क्रम में क्यू.आर. कोड डाले जा रहे हैं। यह भी ऑनलाइन प्रक्रिया है। नई प्रक्रिया में भी बेहतर काम और सामग्री तैयार की गई है, उनका भी यहां सम्मान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षण व्यवस्था जितनी वैकल्पिक (ऑब्जेक्टिव) होगी, तब लोगों के विश्वास योग्य होगी। शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था से समाज और समुदाय में भी ज्यादा विश्वास होगा। संचालक राज्य शिक्षण एवं प्रशिक्षण परिषद श्री पी.दयानंद ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सात माह में राष्ट्रीय परियोजना में महत्वपूर्ण सहयोग दिया गया है। निष्कर्षों के साथ हमें आगे बढ़ना है। राज्य स्तरीय आंकलन के निर्णय के बाद 1-2 माह में जो कार्य किए गए वो अब परिलक्षित हो रहे हैं। दीक्षा में पाठ्य सामग्री को कितनी बार और कितने समय तक देखा गया, उसमें भी काम हुआ है। यह सम्मान अन्य को भी प्रेरणा देगा। समारोह में प्रशासिनक क्षमता में जिला शिक्षा अधिकारी और प्रधान पाठक तथा शैक्षणिक व्यवस्था में संकुल समन्वयक और शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें 6 जिला शिक्षा अधिकारी, 8 संकुल समन्वयक और 8 प्रधान पाठकों, 9 शिक्षकों और हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, पर्यावरण आदि विषय-विशेषज्ञ दल के सदस्यों को भी विशेष रूप से प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया है।



























