देख-रेख के अभाव में करोड़ों का खम्हारपाली बेरियर बन रहा है खण्डहर

खिड़की, दरवाजे सहित सभी सामानों की हो गई है चोरी
काकाखबरीलाल,सरायपाली। खम्हारपाली बेरियर बंद होने के बाद वहां देख-रेख के अभाव में सभी भवन खण्डहर के रूप में तब्दील होते जा रहे हैं. वहां के भवनों में लगे सभी सामग्रियों की चोरी हो चुकी है एवं वह स्थान अब असामाजिक तत्वों का डेरा बन गया है. सुनसान जगह होने के कारण शराब, जुआ जैसे अवैध कारोबारों का वह एक प्रमुख स्थान बनता जा रहा है. इसे देखते हुए आस-पास के ग्रामीणों में भी भय उत्पन्न होने लगा है. ग्रामीणों द्वारा अतिशीघ्र शासन प्रशासन को इस ओर ध्यान देने एवं यहां के शासकीय भवनों का उपयोग किसी अन्य कार्यों में करने की मांग की गई है ताकि करोड़ों की लागत से बने भवनों का सदुपयोग भी हो जाए एवं ग्रामीणों को असामाजिक तत्वों से छुटकारा मिल जाए.
सन 2003 में खम्हारपाली में लगभग 27 एकड़ में शासन द्वारा जांच चौकी का निर्माण किया गया था. जिसमें ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड से ट्रकों एवं अन्य वाहनों का आना जाना प्रतिदिन लगा रहता था. बेरियर में वाहनों के समस्त कागजात जैसे परमिट, बीमा, फिटनेस, टैक्स आदि की जाँच की जाती थी. जाँच में कुछ दस्तावेज न पाए जाने पर उनका चालान काटा जाता था, जिससे शासन को राजस्व की प्राप्ति होती थी. इन समस्त कार्यों के लिए वहां 70 अधिकारियों व कर्मचारियों के कमरे, 10-12 कार्यालय भवन, 5 गोदाम, 3 गेस्ट हाउस आदि लगभग 100 कमरे बनाए गए थे. यहां 50-60 शासकीय कर्मचारियों के अलावा 25-30 प्रायवेट कर्मचारी भी कार्यरत थे. बेरियर में प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 ट्रकों का आना जाना होता था तथा हमेशा 100-200 लोग दिखाई देते थे, जिससे वहां चहल पहल बनी रहती थी. साथ ही वहाँ कई प्रकार की दुकानें भी संचालित होती थी. लेकिन जी एस टी लागू होने के पश्चात् सुगम एवं बाधारहित व्यापार को बढ़ावा देने के उद्दे्श्य से राज्य शासन के द्वारा छत्तीसगढ़ की सीमाओं के सभी जाँच चौकियों को 4-5 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि से बंद कर दिया गया. जांच चौकी के बंद होते ही सभी अधिकारी, कर्मचारी वापस हो गए एवं वह स्थान पूरी तरह से वीरान हो गया. कुछ वर्षों पूर्व करोड़ों की लागत से बनाया गया भवन अब केवल खण्डहर का रूप लेता जा रहा है. बेरियर बंद होने के कुछ समय बाद ही यहां के भवनों से खिड़की, दरवाजे एवं अन्य सामग्रियों की चोरी होनी शुरू हो गई. अब तो यह स्थिति आ गई है कि भवनों में खिड़की, दरवाजों का तो नामो निशान नहीं है बल्कि इलेक्ट्रिक बोर्ड, वायर, बल्ब, स्ट्रीट लाईट आदि सभी सामान गायब हो चुके हैं. कांच के सामग्रियों, टाईल्स को तो बुरी तरह तोड़ फोड़कर फैला दिया गया है. यहां तक की उपद्रवियों ने गोदामों में लगे बडे-बडे शटर को भी नहीं छोड़ा है, उसकी भी चोरी कर ली गई है.

सूनेपन का फायदा उठा रहे हैं असामाजिक तत्व
बेरियर बंद होने के बाद वहां के खाली पडेÞ भवनों का उपयोग असामाजिक तत्व अपने अवैध कार्यों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं. आए दिन वहां जुआरियों, शराबियों एवं अन्य नशा करने वालों का जमावड़ा लगा रहता है. आबादी क्षेत्र से अलग होने के कारण यहां किसी प्रकार की रोकटोक नहीं होती, जिसका फायदा इस प्रकार के लोग उठाते हैं. अब स्थिति ऐसी है कि शाम के समय उसके आस-पास से गुजरने में भी लोग कतराने लगे हैं. इसे देखते हुए ग्रामीणों द्वारा शासन प्रशासन से मांग की गई है कि अतिशीघ्र यहां के भवनों का उपयोग अन्य शासकीय कार्यों के लिए किया जाए ताकि भवनों की सुरक्षा भी हो और लोगों को असामाजिक तत्वों से छुटकारा भी मिल जाए.

























