सरायपाली: बच्चों ने शैक्षणिक भ्रमण में हीराकुंड बाँध व चिड़िया घर का किया भ्रमण

सरायपाली। शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पाटसेन्द्री के स्टॉफ एवं बच्चों ने हीराकुंड बाँध,सम्बलपुर का चिड़िया घर और समलेश्वरी मन्दिर का शैक्षणिक भ्रमण किया। प्रधान पाठक चन्द्रभानु पटेल ने बच्चों को बताया कि इस बाँध से हमें अनेक शिक्षा मिलती है जैसे जलसंसाधन का सही उपयोग जल एक नवकरणीय संसाधन के साथ एक बहुमुल्य संसाधन है।यदि नदियों के पानी को सही तरीके से रोका ,सरंक्षित और संचालित किया जाय, तो उससे खेती, उद्योग और पेयजल की बड़ी जरूरत पूरी की जा सकती है।बाढ़ नियंत्रण किया जा सकता है।यह बाँध महानदी क्षेत्र में आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए बनाया गया था।इससे हम सीखते हैं कि बड़े बाँध प्राकृतिक आपदाओं से लोगों फसलो और शहरों को बचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।ऊर्जा उत्पादन की क्षमता ,हीराकुंड बाँध से बिजली उत्पादन होता है स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।बाँध के कारण सिंचाई सुविधाएँ बढ़ी और लाखों हेक्टेयर भूमि उपजाऊ बनी । हीराकुद बाँध से हमें यह देखने को मिला कि जल के सही एवं समुचित उपयोग हो रहा है।
चन्द्रभानु पटेल ने विद्यार्थियों को चिड़िया घर से मिलने वाली शिक्षा के बारे में बताया कि चिड़िया घर से वन्य जीव को संरक्षण मिलता है जिससे वन्य जीव को सुरक्षित माहौल देकर उनकी प्रजातियों को बचाया जाता है। जैव विविधता का मूल्य हर प्राणी-चाहे छोटा हो या बड़ा प्रकृति के संतुलन के लिए लिए जरूरी है।जू हमे पेड़ पौधों, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की प्रेरणा देता है।जानवरों के व्यवहार और जीवन शैली का ज्ञान यहाँ जानवरों को देखकर हम उनके प्राकृतिक आदतों, भोजन, रहन सहन और स्वभाव के बारे में सीखते हैं, जो किताबों में पढ़ने से अधिक प्रभावी होता है।मनुष्यों और जानवरों के सह-अस्तित्व का संदेश जू बताता है कि इंसान और जानवर दोंनो प्रकृति का हिस्सा है और हमें एक-दूसरे के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए।बच्चों में प्रकृति और प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है, जो भविष्य में अच्छे पर्यावरण-सैनिक बनने में मदद करती है।

























