छत्तीसगढ़

श्रम विभाग की योजना से गीता नाग बनी आत्मनिर्भर

श्रम विभाग की योजना से गीता नाग बनी आत्मनिर्भर

 

‌कोण्डागांव जिला मुख्यालय के भेलवा पदर वार्ड की रहने वाली गीता नाग का जीवन कभी संघर्ष और चिंता से भरा हुआ था। उनके माता-पिता बुजुर्ग हैं, जिनकी देखभाल और पूरे परिवार की जिम्मेदारी गीता के कंधों पर आ गई थी। आर्थिक तंगी के कारण परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो गया था। गीता कई बार सोचती थीं कि परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभाएं, लेकिन आय का कोई स्थायी साधन उनके पास नहीं था।

गीता ने बताया कि इसी बीच सामाजिक कार्यों में सक्रिय इना श्रीवास्तव दीदी से उनकी मुलाकात हुई और बातचीत के दौरान इना ने गीता को श्रम विभाग की उस योजना के बारे में बताया, जिसके अंतर्गत श्रमिक परिवारों को स्वरोजगार के लिए लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। गीता ने हिम्मत जुटाई और इस योजना के लिए आवेदन किया। जल्द ही उन्हें श्रम विभाग से 50 हजार रुपए का लोन स्वीकृत हुआ।

इस राशि से गीता ने ई-रिक्शा खरीदा। धीरे-धीरे उन्होंने कोंडागांव शहर की गलियों और रास्तों पर रिक्शा चलाना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन हिम्मत और लगन के बल पर उन्होंने हार नहीं मानी। गीता ने बताया कि पहले उनके ऊपर कर्ज का बोझ था, लेकिन अब ई-रिक्शा से होने वाली आमदनी से वह धीरे-धीरे कर्ज चुका चुकी हैं।

आज गीता नाग आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि ई-रिक्शा उनके जीवन का सहारा बन गया है। वह रोज शहर में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं और इसी से घर का खर्चा चलता है। परिवार के लोग भी गर्व महसूस करते हैं कि गीता ने न केवल अपनी जिम्मेदारी संभाली बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की।

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काका खबरीलाल

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