नहीं रुक रहा किसानों द्वारा खेतों में बचे अवशेषों को जलाना

नंदकिशोर अग्रवाल,काकाख़बरीलाल,पिथौरा – पिथौरा एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों में धान की फसल लेने के बाद बची धान के पौधों के अवशेष को जलाने पर शासन के प्रतिबंध के बावजूद किसानों द्वारा शासन के आदेश की अवहेलना कर खेत में पड़े अवशेषों को द्वितीय चक्र की फसल लेने के जल्दबाजी हेतु जलाया जा रहा है। जिससे एक तरफ तो धुआं के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं जमीन की उर्वरा को बढ़ाने वाले कीट पतंगों का भी नाश हो रहा है। जिससे खेतों में मिट्टी उपजाऊ होने की बजाय बंजर होती जा रही है ।वहीं आग के फैल जाने से जान माल के नुकसान भी आशंका बराबर बनी रहती है।प्रशासन के द्वारा दिए गए आदेश के बावजूद किसानों का जागरुक ना होना एवं पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करने वाले रोकने वाले शासन के नुमाइंदे फील्ड में कहीं नजर नहीं आते जिससे किसान बेखौफ होकर कर अपने खेतों में बचे अवशेष को जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिससे गांव की शुद्ध हवा तो प्रदूषण की भेंट चढ़ रही है वहीं इसका बुरा असर शहर में भी देखने को मिल रहा है। एक तो शहर की धूल भरी हवा ऊपर से गांव से खेतों में जलाए गए धान के पौधों का अवशेषों पर से निकलने वाली धुवें की हवा नागरिकों को दमे की बीमारी झेलने पर मजबूर कर रही है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लापरवाह लोग जोकि खेतों में पड़े अवशेषों को जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं के ऊपर कड़ी कार्रवाई करें जिससे प्रदूषण को रोकने में सफलता मिले एवं ग्रामीण तथा शहर के लोगों को शुद्ध हवा का लाभ मिले। तथा खेती में भी अवशेषों के सड़ने से मिट्टी उपजाऊ होगी जिससे रासायनिक खादों का इस्तेमाल भी कम करना पड़ेगा।जिससे किसानों को लागत मूल्य में भी कमी आएगी।

























