
रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययनशाला में शुक्रवार को छात्रों के बौद्धिक विकास हेतु ‘‘रिमोर्ट सेंसिंग एवं जीआईएस’’ विषय पर पब्लिक आउटरिच लेक्चर सीरिज के तहत् विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जियोलॉजी विभाग एनआईटी रायपुर के सहायक प्रोफेसर डॉ. हिमांशु गोविल एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रोजेक्ट सांईटिस्ट युद्धवीर सिंह उपस्थित रहे।
श्री गोविल ने छात्रों के बीच अपनी बात ‘‘डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग’’ को लेकर रखी जिसमें उन्होंने बताया कि डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग से वांछित परिणाम प्राप्त करने हेतु संचालन की एक श्रृंखला के लिए वस्तुओं (यानी एक डिजिटल फोटो) को संख्यात्मक प्रतिनिधित्व के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। डिजिटल फोटोग्राफ प्रोसेसिंग एक फोटो से शुरू होता है और उस फोटो का एक संशोधित संस्करण तैयार करता है। साथ ही डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग कई छवि-आधारित कार्यों को स्वचालित कर सकती है, जैसे ऑब्जेक्ट पहचान, पैटर्न का पता लगाना और मैप आदि। उन्होंने बताया कि फोटो प्रोसेसिंग फोटो की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है, जिससे छवियां अधिक स्पष्ट और आकर्षक लगती हैं।
इसी तरह व्याख्यानमाला के दूसरे वक्ता ने ‘‘बेसिक्स ऑफ रिमोर्ट सेंसिंग’’ पर छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि रिमोर्ट सेंसिंग तकनीकी का उपयोग व्यापक है एवं इसकी सहायता से विभिन्न वैज्ञानिक, भौगोलिक तथा भूगर्भीय परिवर्तन का आकलन व सतत् क्रम आसानी से पता लगाया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि रिमोट सेंसिंग डेटा मनुष्यों को प्रभावित करने वाले आवश्यक वैश्विक मामलों में मदद करता है, जैसे ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन, वानिकी और कृषि, मौसम विज्ञान, विनाशकारी घटनाएं, अंतरिक्ष, समुद्री जीवन और विज्ञान। इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक एवं भूगोल अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ.उमा गोले, सहायक प्राध्यापक टीके सिंह, अतिथि व्याख्याता डॉ. सुचिता बघेल, डॉ. दीपक बैज, शिवशंकर मैती सहित विभाग के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें.


























