महासमुंद

सौ सालों से भी पुराना है यह सिद्ध हनुमान जी का ये मंदिर.. पर पुजारी की उदासीनता से भक्तों में बढ़ रही है नाराजगी…

  • विदेशों से आते थे भक्त मन्नत मांगने…

-नंदकिशोर अग्रवाल

काकाखबरीलाल, पिथौरा । पिथौरा के हृदय स्थल पर स्थित है हनुमान जी का ये मंदिर जिसका इतिहास सौ वर्षों से ज्यादा पुराना है।पुराने समय मे इस मंदिर में मंगल पुजारी जी सिद्ध श्री हनुमान जी की पूजा अर्चना किया करते थे। उस समय ये सर्व सिद्ध श्री हनुमान जी का मंदिर पिथौरा नगर के साथ साथ देश प्रदेश के साथ साथ विदेश में भी प्रसिद्ध था। लोग मंदिर के बाहर शाम 5 बजते ही बड़ी संख्या में पहुचने लगते थे। कालांतर में श्री मंगल पुजारी की देवलोक गमन के बाद मंदिर की कमान उनके पुत्र श्री जगदीश जी ने सम्हाली तब तक इस मंदिर का हाल काफी कुछ ठीक रहा था। तथा उनकी मृत्यु के उपरान्त अब वर्तमान में इस मंदिर की बागडोर उनके पुत्र शंकर चौबे के हाथ मे आ गई है।
चूंकि यह मंदिर दक्षीणाभिमुख सिद्ध हनुमान जी का मंदिर है और इसकी ख्याति नगर ही नही देश विदेश में भी है।
ऑस्ट्रेलिया से भी यहां भक्त आ कर अपनी मन्नत पूरी करते थे।
वर्तमान यहां अब नवजवान पंडित शंकर चौबे के आ जाने से उनकी मनमानी के चलते मंदिर की दिनचर्या बिल्कुल ही बदल गई है।
दरअसल पहले जहां मंदिर सुबह सूर्योदय के समय तथा शाम को गोधूलिबेला में ही भक्तों के दर्शन के लिए खुल जाता था। आज यह मंदिर अपने पुजारी के चलते अपनी दशा पर आंशु बहा रहा है। हालात अब इस मंदिर के ये हो चले हैं कि यहां के पुजारी को अपने घर और अन्य कार्यों के पूर्ण हो जाने के बाद अचानक मंदिर की याद आती हैं और आननफानन में जल्दी जल्दी बिना कपड़े पहने मंदिर की ओर दौड़ लगते हैं पर भी शाम को 7 बजे से 8 बजे का समय हो चुका होता है। भक्त मंदिर खुलने का इंतजार करते करते थक कर बाहर से ही पूजा अर्चना कर अपने मन को समझा कर वापस चले जाते हैं।
कई बार तो भक्तजन पंडती जी को फोन कर के उनका इंतजार करके भी वापस चले जाते हैं। भक्तों से चर्चा करने पर उन्होंने कहा की यहां के पुजारी का कोई ईलाज नहीं है।
हम गांव वालों से उम्मीद करते हैं कि इस मामले में हस्तक्षेप कर यहां के मंदिर की ब्यवस्था को सुचारु किया जाये।

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