सह खातेदार किसानों का पंजीयन नहीं होने से……तहसील ऑफिस का चक्कर लगा रहे

शासन के निर्देश के बावजूद भी सह खातेदार किसानों का पंजीयन नहीं होने से सैकड़ों किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित हो जाएंगे। इन दिनों हिस्सेदारी पंजीयन के लिए किसान तहसील ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ रहा है।

किसानों को पोर्टल ना खुलने की बात कहते हुए वापस लौटाया जा रहा है। धान पंजीयन के लिए मात्र 15 दिन ही शेष है। अब किसानों को खेत में खड़े धान को बेचने की चिंता सताने लगी है। हर वर्ष एकीकृत किसानों का पंजीयन होता था, लेकिन इस वर्ष एकीकृत किसानों का पंजीयन नहीं हो रहा है। जिनके परिवार में भाइयों के बीच द्वेष भावना है। नंबरदार किसान अपने भाइयों हिस्सेदार किसानों को पट्टे में धान विक्रय करने नहीं देते हैं। वे एकीकृत हिस्सेदार किसान इस वर्ष धान बेचने से वंचित हो जाएंगे। किसान गिरधारी नायक सिरपुर व गजपति साहू कोदोगुड़ा ने बताया कि उनका भाइयों में आपसी बंटवारा हो चुका है, लेकिन खाता विभाजन नहीं हुआ है। उनके भाइयों में बातचीत बंद है और धान बेचने से उन्हें धान की राशि, बोनस राशि, फसल बीमा की राशि आदि नहीं दिया जाता। तहसील ऑफिस में आवेदन भी किया गया है।
भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिलाध्यक्ष व किसान नेता कामता पटेल ने कहा कि सरकार का प्रशासनिक अधिकारियों पर अंकुश नहीं है। इसके चलते शासन की योजना का हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने रुचि नहीं दिखाई जा रही है। इसके चलते हिस्सेदार किसान शासन की योजना से वंचित होते नजर आ रहे हैं। अन्य जिलों में जब एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन हो रहा है, तो सरायपाली में पंजीयन से किसानों को क्यों वंचित किया जा रहा है, जांच का विषय है? आखिर सरायपाली के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। धान विक्रय, पंजीयन संबंधित समस्याओं का समय रहते निराकरण की मांग उन्होंने मुख्य सचिव से कर अन्यथा की स्थिति में किसान हक की लड़ाई के लिए उग्र आंदोलन करने मजबूर होने की बात कही।
नए किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक
किसानों ने बताया कि हिस्सेदारी पंजीयन के लिए जब आवेदन किए तो उन्हें पोर्टल ना खुलने व हिस्सेदारी पंजीयन ना होने की बात कहते हुए वापस लौटा दिया गया। धान पंजीयन के लिए कम दिन शेष होने व धान बेचने से वंचित होने का अंदेशा होते ही उनके द्वारा धान बिक्री पर रोक लगाने भी आवेदन दिया गया, लेकिन धान बिक्री पर रोक की अनुमति भी उन्हें नहीं दी जा रही है और बेवजह घुमाया जा रहा है। ब्लॉक में इस तरह कई मामले हैं, जिनका अभी तक खाता विभाजन नहीं हुआ है और भाइयों में आपसी दुश्मनी है। इस दुश्मनी का खामियाजा छोटे भाइयों को ही भुगतना पड़ रहा है और वे धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। हर वर्ष एकीकृत किसानों का पंजीयन होता था। जिससे खाते में शामिल सभी सहखातेदार भी रकबा अनुसार पंजीयन करवा कर अपने हिस्से का धान बेच रहे थे और शासन की योजना का लाभ ले रहे थे। हिस्सेदारी पंजीयन ना होने से किसान अब बाजार मूल्य में 1300 से 1500 प्रति क्विंटल की दर से धान बेचने के लिए मजबूर होंगे, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल लगभग 1000 रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ेगा। नए किसानों का पंजीयन एकीकृत पोर्टल पर 31 अक्टूबर तक ही किया जाएगा। इस संबंध में तहसीलदार ममता ठाकुर से संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

























