सरायपाली

सरायपाली:संस्कारवान बच्चों से ही समृद्ध राष्ट्र की कल्पना संभव – राणा

सरायपाली। विद्यालय प्रांगण में मातृ-पितृ पूजन दिवस  का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, व्यवहारिक ज्ञान, आध्यात्मिकता एवं नैतिक मूल्यों का महत्व बताया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए और विद्यार्थियों को माता-पिता के प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना और वेद मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। *प्राथमिक शाला सिरबोड़ा के प्रधान पाठक धर्मेंद्र नाथ राणा* ने अपने उद्बोधन में कहा, *”संस्कारवान बच्चों से ही एक समृद्ध राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है। जब बच्चे अपने माता-पिता का आदर करेंगे, तब वे अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहेंगे और समाज में नैतिकता का संचार होगा।”*

*संस्था प्रमुख हीरालाल साहू* ने कहा कि माता-पिता ही बच्चों के प्रथम गुरु होते हैं, और उनके आदर्शों पर चलकर ही बालक अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में मातृ-पितृ पूजन का विशेष महत्व है, जिससे बच्चों में कृतज्ञता का भाव विकसित होता है।

*शिक्षक क्षीरोद्र चौधरी* ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को व्यवहारिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए, जिससे वे जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता की सेवा ही सच्ची पूजा है।

*शिक्षक कमलेश बारीक* ने कहा, *”आज के समय में जब पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव बढ़ रहा है, तब हमें अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए रखना आवश्यक है। मातृ-पितृ पूजन दिवस हमें यह सिखाता है कि जीवन में सफलता का मार्ग माता-पिता की सेवा और उनके आशीर्वाद से होकर गुजरता है।”*

*सहायक शिक्षक महेश कुमार साहू* ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता ही बच्चों के लिए भगवान के समान होते हैं। यदि उनकी कृपा प्राप्त हो जाए, तो जीवन की हर कठिनाई सरल हो जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने माता-पिता की सेवा को अपने जीवन का संकल्प बनाएं।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता का विधिपूर्वक पूजन किया, उनके चरण धोकर तिलक लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन भजन, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

विद्यालय के इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों बल्कि अभिभावकों के हृदय को भी भाव-विभोर कर दिया और भारतीय संस्कृति की इस पावन परंपरा को जीवंत बनाने का संदेश दिया।

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