चंद्रग्रहण काल में ऐसे दो योग का संयोग, रोगों से मिलेगी मुक्ति

रिपोर्ट- नन्दकिशोर अग्रवाल
काकाखबरीलाल पिथौरा – साल 2018 का पहला ग्रहण 31 जनवरी को पड़ रहा है। यह ग्रहण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि ग्रहण काल में शनि प्रधान पुष्य नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग है। ग्रहण खत्म होने के दौरान नक्षत्र में भी परिवर्तन हो जाएगा जिसके चलते यह कई राशियों को प्रभावित करेगा। ग्रहण काल में किए गए मंत्र, जाप से रोग और शोक से मुक्ति मिलेगी।
खग्रास चंद्रग्रहण कई राशियों को प्रभावित करेगा
ज्योतिषी विद्या के जानकारों के अनुसार 31 जनवरी को पड़ रहा चंद्रग्रहण खग्रास अवस्था का है जो भारत समेत पूर्वी देशों, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड समेत अनेक देशों में दिखाई देगा। चूंकि यह खग्रास ग्रहण है इसलिए इसका प्रभाव मेदिनी अर्थात खगोलीय घटनाक्रम और राशियों पर निश्चित रूप से पड़ेगा।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ग्रहण 5.18 बजे प्रारंभ हो रहा है, उस समय शनि प्रधान पुष्य नक्षत्र है। ग्रहण के मध्य अवस्था में पहुंचते तक बुध प्रधान आश्लेषा नक्षत्र पड़ रहा है अर्थात यह ग्रहण कर्क राशि के जातकों को विशेष रूप से प्रभावित करेगा।






















