छत्तीसगढ़

चुनाव में जमकर खर्च, हिसाब निर्वाचन आयोग की सीमा में हो इसके लिए तगड़ी माथापच्ची

काकाखबरीलाल,रायपुर . राज्य में दो चरण में मतदान पूरा होने के बाद अब 11 दिसंबर को नतीजे आएंगे। इसके एक महीने के भीतर चुनाव खर्च का हिसाब देना है। इसे लेकर उम्मीदवार काफी सतर्कता बरत रहे हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित सीमा 28 लाख से अधिक खर्च होने पर निर्वाचन रद्द हो सकता है, इसलिए अभी से ही प्रत्याशियों ने अपने लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट

नियुक्त किए हैं या वकील को जिम्मेदारी दे दी है : मतदान से पहले दिए गए हिसाब में गड़बड़ी को भी सुधारने के लिए जुगत लगाई जा रही है। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक चुनाव के दौरान प्रत्याशी हर तीसरे दिन अपने खर्च का ब्योरा देते हैं, लेकिन कई बार जब दिया गया ब्योरा तय सीमा से अधिक हो जाता है तो उम्मीदवार पहले के बताए खर्च को फाइनल हिसाब देते वक्त कम करने का जुगाड़ भी लगाते हैं।

हिसाब में किसी तरह की गड़बड़ी पर निर्वाचन रद्द होने से लेकर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगने का खतरा है, इसलिए सभी ज्यादातर उम्मीदवार सीए या वकील की मदद से हिसाब बनवा रहे हैं। खासकर पहली बार चुनाव लड़ने वाली कोई चूक नहीं करना चाह रहे।

पुराने प्रत्याशियों ने कहा- कोई मुश्किल नहीं : वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक खर्च का ब्योरा देने में परेशानी नहीं है। रायपुर ग्रामीण से भाजपा प्रत्याशी नंदकुमार साहू कहते हैं कि हर तीन दिन में हिसाब दिया गया है। फाइनल हिसाब भी दे देंगे। कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण शर्मा कहते हैं कि नियम से चलने वाले उम्मीदवारों को हिसाब देने में मुश्किल नहीं आती।

हिसाब करने वाली टीम अभी रिलीव नहीं : विधानसभा क्षेत्रों में मतदान के बाद व्यय निगरानी टीमें हटा दी जाती हैं, लेकिन लेखांकन यानी एकाउंटिंग के लिए बनाई गई टीम को सबसे ज्यादा वक्त तक आयोग से अटैच रहकर काम करना होता है। 12 जनवरी को जब प्रत्याशी चुनाव का खर्च देंगे, तब एकाउंटिंग टीम पाई-पाई का हिसाब करेगी।

खर्च का ब्रेक डाउन % में (2013 के ट्रेंड के मुताबिक)
{26% गाड़ियों पर 7 लाख 28 हजार
{25% जनसभाओं पर (बिना स्टार प्रचारक के) 7 लाख
{10% स्टार प्रचारक वाली जनसभा 2लाख 80 हजार
{17% प्रचार सामग्री 4 लाख 76 हजार
{5% प्रिंट टीवी प्रचार 1 लाख 40 हजार
{7% अन्य विविध खर्च 1 लाख 96 हजार
{10% कार्यकर्ताओं का खाना-चाय-नाश्ता 2 लाख 80 हजार

(खर्च पैटर्न स्त्रोत – एडीआर की रिपोर्ट)

ऑडिट करेंगे…

ऑडिट करेंगे…

उम्मीदवारों द्वारा उपलब्ध कराए गए खर्च के बिल वाउचर आदि की जांच कर हिसाब का ऑडिट किया जाता है। 12 जनवरी को अभी वक्त है, इसलिए उम्मीदवार नतीजों के बाद ही हिसाब-किताब कराने पहुंचेंगे।

-चेतन तारवानी, सीए

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