जापानी बुखार के लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत ले जाएं अस्पताल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने की अपील

जगदलपुर। बस्तर जिले में जापानी बुखार के लिए प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि बस्तर जिले में अब तक जापानी बुखार से पीड़ित चार मरीजों की पहचान हो चुकी है तथा इस पर रोकथाम के लिए खण्ड चिकित्सा अधिकारियों और निजी अस्पताल संचालकों को भी दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि जापानी बुखार का लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत पास के अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अचानक होने वाले तेज बुखार के साथ-साथ सिर दर्द, गर्दन अकडन, मरीज का पूरी तरह होशो-हवाश मे न होना या मरीज के व्यवहार में अचानक परिर्वतन आना या मरीज को पहली बार झटके आना, 5 से 7 दिन तक तेज बुखार आना, मानसिक बदलाव, गहरी बेहोशी, मूर्छित अवस्था, झटके आना, मांस पेशियों में कमजोरी, मतिभ्रम होना आदि जापानी बुखार के लक्षण हैं। संक्रमित व्यक्तियों की केन्द्रीय स्नायु तंत्र प्रणाली भी प्रभावित होती हैं। शीघ्र उपचार होने पर बीमारी के जटिलताओं से मरीज बच सकता है।
उन्होंने सोने क समय मच्छरदानी लगाने, पूरे बांह की शर्ट एवं फुल पैंट एवं पैरों में मोजे पहनने, मच्छर मारने हेतु घर के भीतर कीट नाशक छिड़काव, धुंआ अथवा फोगिंग, सूअरों को घर से दुर रखने, घर के आस-पास साफ सफाई, जमा हुआ पानी में मच्छर के लार्वा का पर नियंत्रण, घर के खिड़की एवं दरवाजे पर जाली लगावे जिससे मच्छर घर के अन्दर नहीं आ सकें। पीन के लिए हैण्ड पंप अथवा पाइपलान से उपलब्ध पानी का उपयोग। खाने-पीने में उबले हुए पानी के इस्तेमाल करने। खाने से पहले व शौच के पश्चात् साबुन से हाथ धोने की आवश्यकता है। उन्होंने जापानी बुखार का लक्षण देखने पर बहोश मरीज को पीठ के बल न लिटाने, बेहोशी व झटके की स्थिति में मरीज के मुंह में कुछ भी नहीं डालने, घर के आस-पास गन्दा पानी इकठठा न होने देने, इधर-उधर कूड़ा कचरा व गन्दगी न फैलाने, खुले मैदान में और खेत में शौच न करने, तालाब या पोखर के पानी को नहाने या मुंह धोने के लिए भी उपयोग न करने की सलाह दी है।

























