पुष की मन-भावन प्रकृति” शोभाराम (राम) पटेल

*कविता*
*”पुष की मन-भावन प्रकृति”*
✍?✍? *लेखक – शोभाराम (राम) पटेल*✍?✍?
*सुंदर कोमल भू-तल अंबर पुष की जल तलंदर, बहे फुहारे झर-झर कोमल शीतल हवाएं, पुष की ये ठंडी हवाएं जीव-जंतुओं में समाए, ओष की कोहराम वषुंधरा में छाए, जीव-जंतुओं में सिकुड़न आए, ये नजारे मनअति भाए ।।*
“सूरज की किरणें छिपे बादलों में, कोहराम छाए भू-तल अंबर में, शीतल ठंडी हवाएं रोम-रोम में समाएं, पंछीयों के सरगम थम जाए, जब बहे आकाश में शीतल हवाएं, वषुंधरा में पुष की नजारें छाए, ये दृश्य मन अतिभाए ।।”
*चु-चाहती कोयल की सरगम, प्रेम-प्रसंग के गीत गाए पुष की चाँदनी रात में जब बादल छाए, चंद्रमा भी छिप जाए उन सफेद बादलों में, टीम टिमाते तारें गुम हो जाए मानों प्रकृति ने आकाश में चादर बिछाए, ठंडी बहती नजारें वन-उपवन में समाए, ये छवि मन अतिभाए ।।*
“उथल-पुथल मची हैं जीव-जंतुओं, पशु-पंछीयों में, पुष की बहती ये ठंडी शीतल हवाओं में, सूरज छिपे बादलों में कोहराम बरशें अंबर में, ये बहती शीतल हवाएं मन के उत्थान गाए, नये सवरें नये उजाले की राह कोहराम मे समाए, ये पुष की प्रकृति मन मोर अतिभाए ।।
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रचनाकार
*आपका अग्रणी मित्र – शोभाराम (राम) पटेल*
*ग्राम-परसदा बड़े, सारंगढ़, जि.- रायगढ़, छत्तीसगढ़, हिन्दुस्तान*
*मो.- 7974629325*























