लिख दूँ क्या बात पुरानी? – आध्यात्मिक प्रेमी का अपनी प्रेमिका को संदेश वार्ता

नारायणपुर (काकाखबरीलाल).लिख दूँ क्या बात पुरानी? – आध्यात्मिक प्रेमी का अपनी प्रेमिका को संदेश वार्ता
नवयौवना की कहानी, कुछ तेरी ही जुबानी
लिख दूँ क्या बात पुरानी?
तुम तब भी थी सयानी, अब हो गई तू जो दीवानी लिख दूँ क्या बात पुरानी?
“As You Like” हर पन्ने में पढ़ाता था, ‘हस्तलिपियों में’ लिख दूँ क्या बात पुरानी?
नवयौवना की कहानी, कुछ तेरी ही जुबानी
लिख दूँ क्या बात पुरानी?
दुश्मन जो तुम कहलाती थी, अंतर्मन में मुस्कराती थी।
जब पास तुम्हारे आता, धड़कने तेज हो जाती थी।।
फिर भी मोर फोहराबाई, दूर दूर तुम जाती थी।
दुश्मन जो तुम कहलाती थी, अंतर्मन में मुस्कराती थी।
रातें सारी जाग जाग कर, दिनभर जो जमहाती थी।
लाखों बातें होती, फिर भी अधूरी रह जाती थी।।
भौतिकी के पीरियड में, रेकी जो मुझे पढ़ाती थी।
रातें सारी जाग जाग कर, दिनभर जो जमहाती थी।
नवयौवना की कहानी, कुछ तेरी ही जुबानी
लिख दूँ क्या बात पुरानी?
दुश्मन जो तुम कहलाती थी, अंतर्मन में मुस्कराती थी।
रातें सारी जाग जाग कर, दिनभर जो जमहाती थी।
नवयौवना की कहानी, कुछ तेरी ही जुबानी
लिख दूँ क्या बात पुरानी?
राइटर : HP Joshi






















