सरायपाली

सरायपाली : जंगलबेड़ा के प्राथमिक व मिडिल स्कूल में समस्याओं का अंबार कई बार शिकायत के बावजूद नहीं हो रही है समस्याएं दूर

सरकार स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधा देने के चाहे लाख दावे करें, लेकिन आज भी ऐसे कई स्कूल है जो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण ग्राम जंगलबेड़ा के प्राथमिक शाला एवं उच्च प्राथमिक शाला में देखा जा सकता है, जहां समस्याओं का अंबार लगा हुआ है और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। शाला के प्रधान पाठक उक्त समस्याओं को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, जिसके कारण ग्रामीणों और विद्यार्थियों के पालकों में भी आक्रोश देखा जा रहा है।
शासकीय प्राथमिक शाला जंगलबेड़ा में बहुत सारी समस्याएं हैं। यहां का पुराना शाला भवन जर्जर हो चुका है और बच्चों की पढ़ाई के लिए उनका स्वयं का भवन नहीं है। सभी बच्चे अतिरिक्त भवन में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों द्वारा 40 साल पुराने स्कूल भवन को डिस्मेंटल करने के लिए विभाग को प्रस्ताव भी भेज चुके हैं, यह भवन कभी भी गिर सकता है। वहीं प्रधान पाठक कक्ष के लिए भी कमरा नहीं है। प्राथमिक स्कूल में बच्चों की दर्ज संख्या 50 है, जिन्हें दो कमरों में ही पढ़ाया जाता है। एक छोटा बरामदा है, जबकि स्टाॅफ के बैठने के लिए कोई कमरा नहीं है इन्हीं दो कमरों में बैठकर ही सभी कार्य किये जाते हैं। इसके अलावा प्राथमिक शाला में बच्चों के पीने के पानी के लिए स्वयं का बोर नहीं हैं, उन्हें मिडिल स्कूल के बोर से पाईप कनेक्शन जोड़कर पानी लेना पड़ता है। पानी के लिए विभागीय अधिकारियों से मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। लगभग 5-6 वर्ष पूर्व से ही स्कूल का अहाता टूट चुका है। जो बचा खुचा है वह भी असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया जा रहा है। वर्तमान में न तो स्कूल में अहाता है और न ही गेट है। कभी भी बच्चों के साथ कोई गंभीर दुर्घटना घटित हो सकती है, क्योंकि यह स्कूल सड़क से लगकर ही है।

उद्घाटन हुए बिना ही अतिरिक्त कक्ष से टपक रहा पानी
प्राथमिक शाला के लिए सन् 2009-10 में अतिरिक्त कक्ष बनाया गया था, जिसका उद्घाटन भी आज तक नहीं हुआ है। भवन इतना निम्न स्तर का बनाया गया है कि इसमें पानी टपकता रहता है। छत के उपरी भाग में इतना पानी भरा है कि बरसात के बाद भी वहां पानी नहीं सूखता। भवन के अंदर पानी टपकता ही रहता है। इस भवन में न ही ब्लैकबोर्ड बनाया गया है और न ही छत को सही ढंग से बनाया गया है। बहरहाल यह कमरा कबाड़ बनकर रह गया है।

प्राथमिक शाला के पास एक निर्माणाधीन अतिरिक्त भवन भी बनाया जा रहा था, जो 2011 -12 से अधूरा पड़ा है। प्रधान पाठक रथ कुमार भोई से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जितनी राशि स्वीकृत हुई थी, उतना बनाकर छोड़ दिए हैं। अंतिम वेल्यूवेशन के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों को भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक राशि स्वीकृत नहीं हुई है। इस कारण निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।

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काका खबरीलाल

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