बागबाहरा : माता चंडी की स्वयंभू मूर्ति पर भक्तों की है अटूट आस्था

माता के आस्था का पर्व नवरात्रि आज से प्रारंभ हो रहा है। इस पावन पर्व में देवी मंदिरों में नौ दिनों तक माता के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। माता के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है माता चंडी का मंदिर, जो महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लाॅक में घुंचापाली में स्थित है। नवरात्रि पर प्रदेश के ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं। मंदिर में प्राकृतिक रूप से बनी पत्थर की 23 फीट ऊंची दक्षिणमुखी स्वयंभू मूर्ति दुर्लभ और तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है।मंदिर के सेवक और जानकार छन्नूलाल बताते हैं कि कलयुग के प्रारंभ में पांचों पांडव गुप्त वनवास के दौरान इसी स्थान पर ठहरे हुए थे। उन्होंने ने ही पत्थर को माता चंडी का रूप दिया। जहां माता की मूर्ति स्वयं-भू है। जो पहले आकार में छोटी थी लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते हुए आज करीब 23 फीट ऊंची हो गई।
पहले यह मंदिर वनांचल होने के कारण लोगों की पहुंच से दूर था, जहां ऋषि-मुनि और लोग अपनी तंत्र साधना करने आते थे। 1994 में यहां मंदिर का निर्माण हुआ। तब से यहां नवरात्रि का पर्व महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नंदकुमार चंद्राकर ने बताया इस बार भक्तों ने 8500 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराया है। यहां नौ दिनों तक दोनों समय मंदिर प्रांगण में भंडारे का प्रबंध किया गया है।
माता दरबार में आने वाले भालुओं की अद्भुत है कहानी
जितनी अद्भुत यहां की माता की प्रतिमा है, उतनी ही अद्भुत रोजाना यहां आने वाले भालुओं के एक परिवार की कहानी है, जो रोजाना माता के दरबार में आरती के समय पहुंचते हैं। जैसे ही मंदिर की घंटी बजती है, भालू मंदिर में पहुंच जाते है। पहले इन भालुओं को देखकर श्रद्धालु भाग जाते थे, लेकिन अब लोग इनसे डरने की बजाय अपने हाथों से प्रसाद, नारियल खिलाते हैं।




















