पिथौरा : खाने की तलाश में नगर में घूमते दिखे भालू, लोगों में दहशत का माहौल

नंदकिशोर अग्रवाल, काकाखबरीलाल@ पिथौरा। नगर के समीप डिपोपारा, नयापारा एवम अठारागुड़ी ग्राम में विगत सप्ताह भर से कोई आधा दर्जन भालुओं ने डेरा डाला हुआ है।इनमें भालू के दो शावक भी बताए जा रहे है।
प्रत्यक्ष दर्शी ग्रामीण राजा शुक्ला एवम विक्की सलूजा ने बताया कि कल रात कोई 11 बजे नगर से कोई 2 किलोमीटर दूर महाविद्यालय के पहले बस्ती में दो भालू घूमते देख ग्रामीण दहसत में आ गए थे।पिथौरा बया मार्ग पर स्थित रमेश दिक्सित के घर के बरामदे में पहुच कर वहां रखे चावल कोढ़ा को भालू ने अपना आहार बनाया।उक्त सम्बन्ध में प्रियांशू दीक्षित ने बताया कि भालू उनके मवेशी कोठा में कोई 2 घण्टा रुक कर मवेशियों के लिए भिगये कोढ़ा एवम कनकी को आराम से कहकर चला गया।समीप ही मवेशी बंधे थे।उन्हें भी भालू ने कोई नुकसान नही पहुचाया।इसके अलावा आसपास के घरों में घुसने का प्रयास करते रहे।प्रत्यक्षदर्शी राजा एवम विक्की ने बताया कि रात जब वे उस मार्ग से गुजर रहे थे तभी उन्हें एक भालू डिपोपारा स्थित नंदकिशोर अग्रवाल के घर के बाहर लगे गेट को फांदने का प्रयास कर रहा था।जिसे देख कर उन्होंने अपनी कार रोककर कार की हैंड लाइट से भालुओं को दूर खदेड़ा।इसके पूर्व लहरौद नयापारा एवम अठारगुड़ी में भी भालुओं की दहसत बरकरार है।
खाने की तलाश में भालू – ठाकुर
वन्य प्राणियों के बीच कोई 20 वर्ष से अधिक समय बिता चुके जानकर रमेश सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भालू अपने शावकों के साथ है।इसलिए वह खतरनाक हो सकता है।वैसे संभावना यह है कि भालू उम्रदराज होगा।अधिक उम्र के कारण भालू के पंजे घिस जाते है जिसके कारण उक्त भालू जमीन से फल्ली भी नही उखाड़ पाया होगा लिहाहा वह पका पकाया खाने के लिए वे ग्राम में ग्रामीणों के घर तक पहुच रहे है।
बहरहाल वन विभाग को तत्काल उसे जंगल की ओर खदेड़ना चाहिए वरना वह कभी भी हिंसक हो सकता है।क्योंकि वर्तमान में वह फल्ली खाने की गरज से ग्राम के आसपास आता है और पेट नही भरने से वह ग्राम की तरफ प्रवेश भी कर रहा है।क्योंकि इस वर्ष अधिक बारिश के कारण उसका प्रिय भोजन दीमक नही मिल पा रही होगी।वन विभाग को तत्काल मामला संज्ञान में लेकर भालुओं को जंगल की ओर खदेड़ने की आवस्यकता है।
दूसरी ओर वन विभाग वन्य प्राणीयो के शहर के आसपास पहुचने की खबर के बाद भी आंख मूंदे आराम कर रहा है।यदि हालात यही रहे तो कभी भी भालुओं के हमले की बड़ी खबर सुर्खिया बन सकती है।

























