बसना

आदिवासी कन्या आश्रम में भुख से बिलख रहे बच्चे

सत्यप्रकाश अग्रवाल भंवरपुर

0 आदिवासी कन्या आश्रम में नाश्ते एवं भोजन की अव्यवस्था, 

0 नाश्ता और खाना ना मिलने से भूख से बिलख रहे थे बच्चे,

0 अधीक्षिका ने कहा चूल्हा जलाने लकड़ी नही थी,इसलिए नही बन पाया खाना

कन्या आश्रम खोखसा

सत्यप्रकाश अग्रवाल भंवरपुर – भूख से बिलख रहे थे बच्चे, उन्हें ना तो सुबह 7 बजे पेट भर नाश्ता मिला और ना ही 10 बजे का खाना, सुबह 10:30 बजे जब बच्चे स्कूल में परीक्षा देने पहुँचे तब शिक्षकों 

ने बच्चों को भूख से व्याकुल हो, रोते हुए देखा तो उनके लिए नाश्ते की व्यवस्था करवाई, जिसे खाने के बाद बच्चों के चेहरे पर थोड़ी रौनक लौटी तो उन्होंने मुस्कुराते हुये छः माही परीक्षा के पर्चे दिये बाद में स्कूूूल में ही मध्यान्ह भोजन खाने के बाद तृप्त हुये बच्चे,

भुख से बिलखते बच्चे

मामला है बसना ब्लॉक की ग्राम पंचायत खोकसा में वर्ष 2008 से संचालित 50 सीटर आदिवासी कन्या प्राथमिक शाला आश्रम का, जहाँ विगत 14 दिसम्बर 2017 दिन गुरुवार को आश्रम में रह रही 39 छात्राओं को, सुबह 7 बजे दिया जाने वाला नाश्ता आधा अधूरा तो 10 बजे दिया जाने वाला खाना बिल्कुल भी नहीं दिया गया, सुबह 10:30 बजे जब वो छात्राएं आश्रम की प्राथमिक शाला में परीक्षा देने पहुंची तब भूख से बेहाल थी तथा उनमें से कुछ छात्राएं भूख की अधिकता से व्याकुल हो रो भी रही थी, शाला के प्रधान पाठक के पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह का नाश्ता और खाना नही मिला है तथा उन्हें अत्यधिक भूख लगी है, प्रधान पाठक ने उनकी ऐसी बातों को सुन उनके लिए नाश्ते की व्यवस्था करवाई तथा इस संबंध में आश्रम अधीक्षिका से बात की तो उन्होंने बताया कि आश्रम में चूल्हा जलाने लकड़ी नही है इसलिए छात्राओं को आज नाश्ता व खाना नही मिल पाया, सुबह किसी तरह थोड़ा पोहा ही पक पाया था जिसे छात्राओं को नाश्ते के रूप में थोड़ा थोड़ा दिया था,

इधर आश्रम में रहने वाली छात्राओं में कक्षा पाँचवी की पुष्पांजली सिदार, सुनीता चौहान ग्राम बिरइनडबरी, दुर्गा सिदार ग्राम हरदा नांवागाँव, यशोदा असगर ग्राम बुधुदोंगर तथा कक्षा चौंथी की डिलेश्वरी उराँव ग्राम बिरसिंगपाली, मायामोती यादव ग्राम दलदली, माहेश्वरी असगर ग्राम बुधुडोंगर तथा खुशबू यादव ग्राम दलदली, ने बताया कि अक्सर ऐसा होता है जब उन्हें कभी नाश्ता तो कभी खाना नहीं दिया जाता, अधीक्षिका से शिकायत करने पर उनके द्वारा बच्चियों को पीटा जाता है, एक बच्ची ने बताया कि अभी कुछ ही दिन पहले अधीक्षिका की पिटाई से एक बच्ची को बुखार आ गया था, बच्चियों ने बताया कि उन्हें जो खाना दिया जाता है उसमें भी गुणवत्ता का कभी खयाल नही रखा जाता, अक्सर उन्हें नाश्ते में पोहा और मिक्चर दिया जाता है, जिसमे पोहा में केवल हल्दी और नमक डालकर दे दिया जाता है, दोपहर में चावल और सब्जी दी जाती है, जिसमे प्रायः बैंगन की सब्जी बनाई जाती है जिसमे अक्सर कीड़े निकलते हैं, दाल कभी नही बनाई जाती, उस पर भी बच्चों को डराया जाता है कि अगर इन सब की शिकायत किसी से की तो उन्हें आश्रम से निकाल दिया जाएगा,अधीक्षिका के ऐसे व्यवहार से त्रस्त हो सभी छात्रायें आश्रम छोड़ने का मन बना चुकी है, उनका कहना है कि इस बार जब छुट्टी में घर जाएँगे तो यहाँ वापस नहीं आयेंगे,

खाने को लेकर बच्चे अक्सर शिकायत करते हैं, जिस पर हमारे द्वारा अधीक्षिका को खाने की गुणवत्ता और हमेशा उपलब्धता का ध्यान रख़ने कह दिया जाता है, अब इससे ज्यादा हम और क्या कर सकते हैं।

-पीताम्बर सिंह जगत

हेड मास्टर

आदिवासी कन्या आश्रम शाला खोकसा
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ऐसा हमेशा नहीं होता, लकड़ी वाले ने समय पर लकड़ी लाकर नही दी, इसलिए ऐसा हो गया,

-गीता पटेल

अधीक्षिका

आदिवासी कन्याआश्रम खोकसा

देखें विडीयो में भुख से रोते हुये बच्चे-


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