महांसमुद: पशु चिकित्सकों की हड़ताल जारी दूध उत्पादन में कमी आई

प्रदेश में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर रहने वालेे महासमुंद जिले में इन दिनों दूध उत्पादन में कमी आई है। पिछले डेढ़ माह से पशु चिकित्सकों की हड़ताल जारी है। बीमार होने पर मवेशियों का इलाज करने वाला कोई नहीं है। इसके अलावा बधियाकरण व कृत्रिम गर्भाधान का काम भी बंद है। संचालक पशु चिकित्सा विभाग के डीडी झारिया का कहना है कि सहायक चिकित्सा अधिकारी 2 मार्च से हड़ताल पर चल रहे हैं। इसके कारण टीकाकरण, गर्भाधान व बधियाकरण का काम प्रभावित है और दूध का उत्पादन 65 हजार लीटर प्रतिदिन से अब 20 हजार लीटर प्रतिदिन तक आ पहुंचा है।
इस तरह सामान्य उपचार नहीं मिलने से इन दिनों कई मवेशियों की मौतें भी हो चुकी है। किसान बीमारी व लगातार हो रही मौत को लेकर परेशान हैं। वहीं पशु पालक किसान जब अपनी समस्या लेकर अधिकारी के पास जा रहे हैं, तो केवल एक ही बात कहकर वापस भेज दिया जा रहा है कि चिकित्सक हड़ताल पर चले गए हैं, जैसे ही काम पर लौटेंगे, उपचार शुरू कराया जाएगा।
गौरतलब है कि महासमुंद जिले 175 सोसायटी के 7770 सदस्य कार्यरत हैं। यहां 65 हजार लीटर दुग्ध उत्पादन होता है। अफसरों की मानें तो 60 फीसदी दूध निगम को जाता है, लेकिन हड़ताल की वजह से दूध का उत्पादन कम हो गया है और किसान पर्याप्त मात्रा में निगम का दूध नहीं भेज पा रहे हैं। इसके अलावा जिले मे 12 चिकित्सालय एवं 44 पशु औषधालय है। सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के 74 पद स्वीकृत है और 44 सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पदस्थ हंै जबकि 30 पद खाली है।
इस वक्त पशु चिकित्सक हड़़ताल पर हैं और पशुओं के सामान्य उपचार नहीं होने की वजह से दूध का उत्पादन कम हो गया है। पशुओं में बीमारी आ गई है लेकिन उसके उपचार के लिए चिकित्सक नहीं है। विभाग ने किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की है। पशुपालक और किसान अपने मवेशियों के उपचार के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पशुओं का बधियाकरण और गर्भाधाान भी नहीं हो रहा है।























