बसना

लॉकडाउन का असर लोगो के साथ आवारा पशुओं और जानवरों पर भी

मनहरण सोनवानी कि रिपोर्ट
(बसना काकाखबरीलाल).(शहर)। पिछले कई दिनों से शहर लॉकडाउन है। कहीं कोई आयोजन नहीं हो रहा है, कोई होटल नहीं खुला है। होटलों और अन्य जगहों से जूठन आदि खाकर पेट पालने वाले शहर के आवारा पशु और जानवरों के लिए शामत आ गयी है। जानवरों का दर्द समझ कर शहर के कुछ समाजसेवी ने अच्छी पहल की। बाहर घूमने वाले व दूसरों पर निर्भर रहने वाले बेजुबान गाय, आवारा कुत्तों की भूख मिटाने के लिए इनका भोजन तैयार करके बंटवाया। वहीं पशुओं के लिए चावल, दाल व अन्य भोजन व्यवस्था की है। 

इन सेवा कारी को भगवान कहा जाए या फिर उसका कोई अवतार अभी के परिस्थिति में लोग इंशानो को घिन भावनाओं से देख रहे हैं और बसना नगर के समाज सेवी द्वारा आवारा पशुओं को अपने घरों से भोजन पकाकर खिलाया रहे हैं, लॉकडाउन में प्रतिदिन इन समाजसेवी लोग बसना के जगदीशपुर मार्ग भारत किराये भंडार के पास नगर के आवारा पशुओं को भोजन कराते है। 

 बड़ी बात यह है कि आवारा पशुओं के लिए प्रतिदिन 5 से 10 किलो चावल से भोजन बनवाया जाता है। साथ ही बिस्कुट खिलवाया जाता है। इस काम मे जुटे लोगो ने किसी से कोई सहयोग न लेकर यह कार्य कर रहे है, और पत्रिका के संवाददाता से चर्चा के दौरान कहा कि आवारा पशुओं को भोजन करवाने पर मीडिया में हम नही आना चाहते, यह एक सेवा कार्य है जो सेवा भाव से करने पर हमें खुशी मिलती है। जो हम निस्वार्थ भाव से कर रहे, उन्होंने समस्त लोगों से आग्रह किया अंचल में इस समय कोरोना वाइरस के प्रकोप से सरकार द्वारा लॉकडाउन किया गया है इस वजह से गरीब व निसहाय लोग जिनके पास राशन की सामग्री नही हैं वैसे जरूरतमंद लोगो की सेवा कीजिये और कोशिश कीजिये कि गरीबो को दान देते समय उनका फ़ोटो खींचकर उनका मजाक न उढ़ाये। कई ऐसे गरीब भी होते है जो दान तो लेना चाहते है लेकिन आपके फ़ोटो लेकर शोसल मीडिया में शेयर के चलते दान लेने से कतराते है और सामने नही आते।

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छत्तरसिंग पटेल

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