
सत्यप्रकाश अग्रवाल भंवरपुर – विगत 16 दिसम्बर शनिवार को समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार आदिवासी कन्या आश्रम खोकसा में बच्चों को नही मिल रहा भोजन पर संज्ञान लेते हुये उच्चाधिकारियों के आदेश पर ग्राम खोकसा के आदिवासी कन्या आश्रम ( जो कि आजकल विगत जनवरी माह से जगह की कमी के चलते ग्राम खोकसा से स्थान्तरित हो समीपस्थ ग्राम सागरपाली के एक निजी भवन में संचालित हो रहा है ) में जाँच हेतु आदिम जाति कल्याण विभाग बसना के खण्ड प्रभारी रामधन सिदार, अपने ही विभाग के एक कर्मचारी दयाराम बुडेक के साथ पहुँचे, जहाँ उन्होंने आश्रम में संचालित मेस व्यवस्था का निरीक्षण कर, आश्रम में उपस्थित कर्मचारियों का बयान लिया,
उन्होंने बताया कि उक्त पूरे मामले में एक ओर जहाँ आश्रम अधीक्षिका की लापरवाही उजागर हुई है वही इनके तथा प्राथमिक शाला के हेड मास्टर व अन्य शिक्षकों के आपसी तालमेल में कमी भी नजर आ रही है, मैं इस पूरे मामले की अपनी जाँच रिपोर्ट अपने उच्चाधिकारियों को सौंप दूँगा, इसके बाद जो भी उचित कार्यवाही होगी उन्ही के द्वारा की जाएगी,
आदिवासी कन्या आश्रम में भुख से बिलख रहे बच्चे – बसना ।
इन्हें भी खाना बनाने गैस सिलेंडर उपलब्ध होना चाहिए
आदिवासी कन्या आश्रम खोकसा में बच्चियों को खाना ना मिलने की घटना से व्यथित क्षेत्र क्रमांक 11 की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शांति ठाकुर ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ओर तो सरकार धुँआ मुक्त रसोई के लिए उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को गैस कनेक्शन वितरण कर रही है, आंगनबाड़ीयों तथा स्कूलों में भी खाना बनाने गैस दी जा रही है मगर इस आश्रमों में आज भी खाना पारम्परिक चूल्हे पर ही लकड़ी जलाकर बनाया जा रहा है, सरकार का ये दोहरा मापदंड समझ से परे है, क्या इस विभाग को खाना बनाने के लिए गैस चूल्हा तथा सिलेंडर इस्तेमाल का अधिकार नहीं है, यदि यहाँ भी खाना गैस चूल्हे पर सिलेण्डर लगाकर बन रहा होता तो बिना लकड़ी के खाना ना पकने की ये ग्राम खोकसा के आदिवासी कन्या आश्रम की घटना ही नहीं घटती, उन्होंने सरकार से इन आश्रमों में भी खाना बनाने के लिये गैस सिलेंडर तथा चूल्हा प्रदान करने पर विचार करने मांग की है,

























