IPL सट्टा बाजार गर्म , व्यापारी व बेरोजगार युवा वर्ग सट्टे की आगोश में

रितेश गुप्ता,कोरबा(काकाखबरीलाल)। आईपीएल मैचों के शुरू होते ही शहर से लेकर गाँव तक एक बार फिर से सट्टा-बाजार गर्म हो गया है। इस कारोबार में कई सफेदपोश लोग भी शामिल हैं जो कहने के लिए शहर के बड़े व्यापारी हैं और उनका असली काम सट्टे का ही है। इसके अलावा सीमावर्ती जिला के सटोरियों के द्वारा सट्टा लगाने की व्यवस्था की जाती है।
हम बात कर रहे कोरबा जिले के अंतिम में बसे ग्राम पसान की जहाँ युवाओं सट्टा बाजार के समृद्ध सिंडिकेट के माध्यम से जकड़ लिया है , युवा सटोरी युवा वर्ग को यश और नॉट के जाल में फ़ासकार बर्बादी की कगार में लाने के खेल खेल रहे हैं…
मीडिया ने जब इस संबंध में कुछ सटोरियों से संपर्क साधा तो नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि पसान में इन दिनों बड़े वर्ग के युवा व्यापारी बुकी के रूप में बड़े स्तर पर सट्टेबाजी से जुड़े हुए हैं।
इनमें सभी युवा वर्ग व्यापारी है। इस कारोबारी ने सट्टे का कारोबार बस स्टैंड पसान से लगे इलाके और आसपास के कुछ गांवों में बनाया हुआ है। यहीं से पूरा धंधा ऑपरेट हो रहा है।
व्यापारियों से लेकर यूथ भी ग्रसित
इस खेल में शहर के व्यापारियों से लेकर युवा तक शामिल हैं. दूसरे जिले में बैठे सट्टा बाजार के मास्टर लोकल एजेंट्स के माध्यम इस बार के आइपीएल में भी अपना कारोबार फैलाये हुए है.
कैसे लगता है रुपया
आईपीएल मैच के दौरान सट्टे के इस खेल में मैच शुरू होने से पहले दोनों टीम का रेट जारी किया जाता है, जो हर गेंद से लेकर टीम की जीत तक भाव चढ़ते-उतरते हैं. इसी दौरान मैच में सट्टा लगाने वाले अपनी मनपसंद टीम पर भाव के हिसाब पर रुपया लगाते है. अगर टीम जीत जाती है तो भाव के हिसाब से रुपया मिलता है और अगर टीम हार जाती है, तो एजेंट को रुपया देना होता है.
सटोरिए हाईटेक तरीके से सट्टा खिला रहे हैं, जिन्हें पकड़ने की जरूरत है ताकि बेरोजगार युवा वर्ग बर्बादी की कगार पर पहुँचे व इस मामले में जागरूकता की आवश्यकता भी हैं.वहीं मीडिया द्वारा अगली कड़ी में बड़े सटोरियों के नाम , तरीको ,व वॉइस रिकॉर्डिंग का प्रकाशन जल्द ही किया जाएगा



























