बसना

अधिकतम नारा और न्यूनतम काम वाली सरकार के आम बजट से सभी वर्ग में निराशा- खालिद दानी

बसना(काकाखबरीलाल)। केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट को बसना युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष खालिद दानी ने आम जनताओं के लिये निराशाजनक बताते हुये। लोगों की उम्मीदों और जनादेश अपमान करने वाला बजट बताया।बजट में छतीसगढ़ कुछ नही है।देश में जहां जीडीपी घटा है। बेरोज़गारी, मंहगाई बढ़ी है और बैंकिंग सेक्टर भी गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे है। वैश्विक महामारी करोना संकट के चलते सभी वर्गों की कमर टूट चुकी थी। सभी वर्गों ने सरकार पर आस लगाए बैठे थे कि केंद्र की सरकार से कुछ तो रहते मिलेगी करके लेकिन अधिकतम नारा और न्यूनतम काम वाली सरकार ने आम बजट का फायदा देश में केवल दो ही लोग एक अंबानी और दूसरा अडानी को होगा।विनिवेश के नाम पर रेलवे के फ्राइट कॉरिडोर, एयरपोर्ट्स, एनएचएआई, बीपीसीएल, एचपीसीएल, आईओसीएल, गेल, केंद्रीय भंडारण निगम, पावर ट्रांसमिशन लाइन्स और खेल स्टेडियमों को बेच कर मोदी सरकार भाजपा को पिछले चुनावों में उद्योगपतियों द्वारा दिए गए इलेक्शन फंड को देश की बहुमूल्य संपत्तियां लुटा कर चुकाना चाह रही है। कांग्रेस द्वारा 70 सालों की खून-पसीने की मेहनत से बनाई गई राष्ट्रीय संपत्तियों को मोदी सरकार कौड़ियों के भाव बेच कर देश को तबाह कर रही है। आज भी कृषि देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं।इसे सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र के योगदान के रूप में ही नहीं देखा जाता बल्कि कृषि पर बड़ी संख्या में लोगों की निर्भरता और औद्योगिकीकरण में कृषि क्षेत्र की भूमिका के रूप में भी देखा जाता हैं। देश में कई महत्त्वपूर्ण उद्योग कृषि उत्पाद उपज पर निर्भर हैं। जैसे कि वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग या फिर लघु व ग्रामीण उद्योग, जिनके अंतर्गत तेल मिलें, दाल मिलें, आटा मिलें और बेकरी आदि आते हैं। लेकिन साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना मोदी सरकार की लक्ष्य एवं किसान के कल्याण से कोई वास्ता नहीं है जिस तरह का गोलमोल अस्पष्टता बजट पेश किया गया है उसका विश्लेषण करना भी बड़ा कठिन कार्य है। देश की लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर आश्रित है लेकिन इतनी बजट बड़ी जनसंख्या के लिए केवल 16 सूत्री कार्यक्रम किसान कल्याण नहीं कर सकते। किसानों का मुख्य विषय लाभकारी मूल्य और खरीद की गारंटी का बजट भाषण में वित्त मंत्री जी द्वारा जिक्र तक नहीं किया गया इससे बड़ी निराशा किसानों के लिए है। फसल बीमा में बदलाव, कर्ज़ माफी, किसान सम्मान निधि में बजट न बढ़ाना आदि महतवपूर्ण विषयों को वित्त मंत्री ने छुवा तक नहीं। रासायनिक खाद में सब्सिडी में कमी पर वे कहते हैं कि इससे उत्पादन प्रभावित होगा।यह बजट महंगाई के साथ आम जनता की समस्याएं बढ़ाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि आज किसानों के विकास के लिए सरकार की ओर से डीजल और पेट्रोल पर सेस लगाया जा रहा है। हैरानी की बात है कि सबसे ज्यादा डीजल का इस्तेमाल किसान करते हैं। खालिद दानी ने आगे बताया कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन के दौरान दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों से जब करोड़ों की संख्या में प्रवासी अपने गांव-घर पहुंचे तो कृषि क्षेत्र के अलावा महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून ने बेकाम और भोजन की तलाश करने वाले लोगों के रोजमर्रा जीवन को चलाने में बड़ी भूमिका अदा की। लोगों को आम बजट में मनरेगा को और ज्यादा शक्ति और गति देने की आस थी, लेकिन बजट में मनरेगा के आवंटन ने झटका दिया है। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में निर्मला सीतारमण ने मनरेगा के लिए 73,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, यदि इसकी तुलना बीते वित्त वर्ष के संशोधित बजट के आवंटन 111,500 करोड़ रुपये से की जाए तो यह करीब 34.52 फीसदी कम है। बजट कम होने का सीधा मतलब श्रम दिवस के कम होने और रोजगार के अवसरों में कमी से भी है। कुल मिलाकर यह केंद्र की आम बजट गांव, गरीब, आम जनता एवं सभी वर्गों के उम्मीदों को पूरा करने में विफल रहा है।

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Ramkumar Nayak

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