सरायपाली

सरायपाली : आजादी के 75 सालों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे है नया बस्ती के ग्रामीण

सरायपाली। ब्लाक मुख्यालय से 28 किमी दूर ग्राम पंचायत पझरापाली के आश्रित ग्राम जटाकन्हार के नया बस्ती के ग्रामीणों को आजादी के 75 सालों के बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

पीने के पानी, उबड़ खाबड़ सड़क, आंगनबाड़ी, पीएम आवास आदि कई सुविधाएं यहां लोगों के लिए केवल सुनने भर के लिए है। हकीकत यह कि ये सारे सुविधाओं से लोग वंचित हैं। गांव जटाकन्हार से लगभग 2.5 किमी दूर एक नया बस्ती का निर्माण हुआ है। जो विकास से कोसों दूर है। लगभग 19 साल पहले ग्राम जटाकन्हार में भयंकर बाढ़ तबाही आई थी, इस वजह से 10 से 15 घर बह गये थे। पंचायत द्वारा इन 10-15 घरों को गांव से 2.5 किमी दूर एक नया बस्ती बनाकर रहने के लिए जमीन दिया गया, लेकिन सभी बेघर लोगों ने अपने खर्चे से वहां घर का निर्माण किए और किसी के द्वारा कुछ सहायता राशि भी नहीं मिली। आज इस नया बस्ती में लगभग 35 घर बन गए हैं। यहां की जनसंख्या 200 के उपर है। इस बस्ती में विभिन्न समस्याओं का अंबार है। यहां के ग्रमीणों को आज तक 19 साल हो गया आवासीय पट्टा नसीब नहीं हुआ है। साथ ही अधिकांश घरों को प्रधानमंत्री आवास भी प्राप्त नहीं हुआ है । वहीं इस गांव से रास्ता दो तरफ जाता है एक सरायपाली और एक बसना लेकिन इस गांव के ग्रामीणों को बसना जाना अधिक सुविधा होता है लेकिन सड़क बहुत ही खराब है। लोगों को आना जाना करने में भारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। पेयजल हेतु मात्र एक हेंडपंप है जिस पर पूरी बस्ती निर्भर है। ग्रामीण कुमारलाल भास्कर, धोबिराम भास्कर, फगुलाल पालेसर, जगदीश लाल भास्कर, नत्थूलाल सिदार, बृंदावन भास्कर, केशरीबाई भास्कर पंच, सैलेन्द्री भास्कर पंच, सुरेशकुमार गड़तीय उपरपंच, रोशन भास्कर, मदन सिदार आदि ने बताया कि बस्ती में 2 बोर, 1 हेण्डपंप हैं जिसमें से 1 बोर चालू है और 1 हेण्डपम्प लेकिन बोर का भी जल स्तर कम हो जाने से नहीं चल रहा है। सिर्फ 1 हेण्डपंप में पीने लायक पानी निकल रहा है और उसी से 35 घर आश्रित हैं। हेण्डपंप भी रूक-रूक कर चलाते हैं तभी लोग पानी भर पाते हैं। ग्राम जटाकन्हार मंें पानी के लिए समस्या घर-घर नल जल लगाने हेतु सर्वे हो चुका है लेकिन इस नया बस्ती में कुछ भी विकास कार्य सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। उबड़ खाबड़ सड़क में चलने को मजबूर ग्रामीण ग्राम जटाकन्हार से बस्ती तक सड़क जर्जर है। बस्ती के लोगों को बसना जाना हो तो भी जर्जर उबड़-खाबड़ सड़क से होकर जाना पड़ता है। गांव से बस्ती की दूरी 2.5 किमी हैं, सड़क इतनी खराब है कि स्कूली बच्चों को अधिक परेशानी होती है। वहीं किसी भी समय जरूरी काम पड़ने पर लोगों को सरायपाली या बसना जाना पड़ता है तो इसी उबड़-खाबड़ रास्ते से होकर जाना पड़ता है। इस गांव से सरायपाली 28 किमी है और बसना 18 किमी है। इस कारण अधिकांश ग्रामीण बसना जाना ही सुविधा समझते हैं। लेकिन इस कच्ची उबड़ खाबड़ सड़क पर उस समय मुश्किल होता है जब कोई व्यक्ति गंभीर बीमार, इमरजेंसी में लोगों को ले जाना टेढ़ी खीर साबित होता है। नया बस्ती में आंगनबाड़ी का अभाव यहां पर आंगनबाड़ी न होने से यहां के बच्चे इस सुविधा से वंचित हैं। जटाकन्हार में आंगनबाड़ी है लेकिन 2.5 किमी की दूरी अधिक होंने से कोई भी बच्चों को नहीं भेजता । आंगनबाड़ी खोलने लायक आबादी है फिर भी आज तक प्रयास नहीं हुआ। हालांकि 200 से अधिक आबादी वाले गांव में एक आंगनबाड़ी खोला जाता है, लेकिन यहां तो 200 से अधिक जनसंख्या है। सर्वे के अनुसार यहां कुल 109 पुरूष तथा 104 महिलाएं है। वहीं 0 से 6 माह के 4 बच्चे हैं, 6 माह से 3 वर्ष के बच्चे 11 हैं तथा 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के 17 बच्चे हैं जो आंगनबाड़ी के अंतर्गत आते हैं। इस हिसाब से यहां मिनी आंगनबाड़ी खुल सकता है। लेकिन अभी तक शासन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देने से बच्चों की शिक्षा के साथ उनका मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई वर्षों से यहां मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र खोलने की मांग की जा रही है। इस संबंध मंे सरपंच वृंदावन डडसेना से पूछे जाने पर बताया कि गांव के रोशन भास्कर द्वारा गांव के रोड के लिए राशि स्वीकृत करवाया गया है- टेंडर मिलते ही काम प्रारंभ हो जाएगा। वहीं पानी की समस्या के लिए घर-घर नल जल कनेक्शन हेतु सर्वे हो चुका है, इसका भी जल्द काम प्रारंभ हो जाएगा। आंगनबाड़ी नहीं होेने की बात पर उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के मांग अनुसार ही बस्ती में मिनी आंगनबाड़ी खोलने की बात कही।

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छत्तरसिंग पटेल

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