छत्तीसगढ़धमतरी

फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे 9 शिक्षाकर्मियों पर गिर सकती है गाज

धमतरी(काकाखबरीलाल)। जिले में अमान्य प्रमाण पत्र के सहारे 9 शिक्षाकर्मियों के नौकरी करने का एक और मामला सामने आया है। शासन द्वारा गठित जांच टीम की पड़ताल में यह गड़बड़ी पकड़ी गई। अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद के जिस संस्था का बीएड प्रमाण पत्र संलग्न किया है, उसे शासन से मान्यता नहीं है। शिक्षाकर्मियों को वखस्तिगी के पूर्व अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।

धमतरी जिले में शिक्षाकर्मी नियुक्ति में फर्जीवाड़े की फाइल अब दर परत दल खुलने लगी हैं 9 शिक्षाकर्मियों की बीएड प्रमाण पत्र की वैधता और संस्था की मान्यता को | लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जिला पंचायत सूत्रों के मुताबिक ये सभी 9 शिक्षाकर्मी मगरलोड, नगरी और कुरूद ब्लाक के हैं, जिनके प्रमाण पत्रों की जांच में कहीं भी बीएड प्रमाण पत्र की मान्यता को लेकर सर्टिफिकेट संलग्न नहीं है।

इससे प्रथम नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों के अविधिमान्य करार दिया है। इसे लेकर अब जिला पंचायत ने भी कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है। सीईओ नम्रता गांधी ने बीते 26 नवंबर 2020 को संबंधित वर्ग-1 और 2 के सभी 9 शिक्षाकर्मियों को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर उपस्थित होकर : दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा है, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इनसे मांगा गया अंतिम पक्ष जिला पंचायत ने मगरलोड ब्लाक के जिन 9 शिक्षाकर्मियों से इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) के हिंदी साहित्य सम्मेलन से संबद्ध बीएड प्रमाण पत्र की वैधता एवं मान्यता के संबंध में दस्तावेज मांगा गया है, उनमें व्याख्याता टीकेश्वर प्रसाद पांडेय हायर सेकंडरी स्कूल अमलीडीह, शिक्षक जागेश्वर निषाद माशा करेली बड़ी, शिक्षक पूर्णिमा बाई माशा चरा, व्याख्याता गुरूचरण साहू उमा हसदा नंबर-1 (मगरलोड),शिक्षक भागीरथी चन्द्रवंशी माशा गोबरा, शिक्षक रूपेश्वर कुमार साहू माशा सिंधौरीखुर्द (कुरूद), व्याख्याता कृष्ण कुमार केवट उमा घुरावह शिक्षक प्रमेश दीप माशा साकरा (नगरी) तथा शिक्षक रेणुका चन्द्राकर माशा देवादा पाटन (दुर्ग) शामिल है।

कार्रवाई को लेकर मचा हड़कंप

उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े मामले को वर्ष-2005 में आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार चंदना ने उठाया था। शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और अन्य दस्तावेजों के संबंध में अनेक प्रमाण उपलब्ध कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। मध्य प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद ऐसे भ्रष्ट आवरण वालों पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक जिलेभर में फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी करने वालों संख्या 2 सौ से ज्यादा है। ऐसे में उनमें बर्खास्तगी की कार्रवाई को लेकर हड़कंप मच गया है।

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Ramkumar Nayak

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