दंतेवाड़ामेरा गांव - मेरा शहर

निकिता बनी …..अपराजिता पूर्ण किया नाम की सार्थकता

(दंतेवाडा़ काकाखबरीलाल).

दंतेवाड़ा के दुर्गम,घने जंगलों के मध्य स्थित छोटे से गांव चितालूर की निकिता मरकाम जो 12 वीं तक पढ़ी है, अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती है। अपने नाम निकिता के अर्थ की तरह अपराजिता हैं, जो नई दिशा स्वसहायता समूह निर्मित कर कई कीर्तिमान रच रही हैं। समूह बनाने से पहले निकिता और उसके पति रोजगार की तलाश में दर बदर की ठोकर खाते फिर रहे थे ,परन्तु कहीं काम मिल पाना मुश्किल था ऊपर से परिवार की आर्थिक स्थिति दिनों दिन बिगड़ती ही जा रही थी। ऐसे में दीदी को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के बारे में जानकारी मिली जिससे हमें एक महिला स्व सहायता समूह के निर्माण की प्रेरणा मिली। समूह बनाने के लिए निकिता दीदी ने अपने आसपास की महिलाओं का बैठक आयोजन कर समूह के निर्माण में सहयोग हेतु प्रार्थना की तथा उन्हें इस योजना से होने वाले फायदों के बारे में समझाया।
उनके समझाने पर महिलाओं ने मिलकर 2 मार्च 2010 को नई दिशा नामक स्वयं सहायता समूह की स्थापना की। बाद में 2015 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से यह स्व सहायता समूह विभिन्न नए आजीविका के नए योजनाओं के लाभ हेतु जुड़ा।
निकिता दीदी के बिहान योजना में जुड़ने उपरांत इन्हे जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत इन्हे पंच सुत्रों का पालन करना होगा जिसके पश्चात् बैंक से 6 माह के भीतर ऋण प्राप्त होगा और इसके माध्यम से समूहों के सदस्य अपने पृथक व्यापार के लिए समूह से ऋण प्राप्त कर स्वतंत्र व्यापार की स्थापना कर पायेंगे, इन्होने अन्य महिलाओं को समूह से जुड़ने हेेतु आमंत्रित किया और इस कार्य में ये सफल भी हुई। तकरीबन एक साल के बाद अचार, बड़ी, पापड़ निर्माण हेतु आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त कर बैंक लिंकेज की राशि से एक लाख का ऋण प्राप्त हुआ। इन्होने इस राशि में से 50 हजार रूपये का अचार तैयार कर स्कूलों में बेचा। इन्होने ईंट निर्माण हेतु एक लाख रूपये का ऋण लिया, और इनका व्यापार ठीक से चल पड़ा। इस परियोजना के अंतर्गत आज समूह के पास कड़कनाथ कुक्कुट पालन, ईंट निर्माण इकाई, मिनी राईस मिल की स्थापना अनुदानों से प्राप्त हई, सेनेटरी पेडस निर्माण करने वाले इकाई ग्राम संगठन के माध्यम से किया गया है जिससे समूह के साथ ही साथ इनको काफी फायदा पहॅुचा तथा अधिक अनुशासित होकर कार्य करने लगी। अभी वर्तमान में इनके घर स्वयं का एक वेल्डिंग दुकान और एक किराना दुकान भी है और अभी कोरोना जैसी महामारी में भी इनके द्वारा 1500 मास्क का निर्माण कर विक्रय किया जिससे इनको लगभग 15 हजार रूपये का  लाभ मिला।
    कड़कनाथ पालन:-निकिता दीदी समूह से ऋण लेकर कड़कनाथ पालन हेतु शासकीय योजनाओं का लाभ लेते हुए शेड बनवाकर पिछले 3 सालों से कर रही है। इस गतिविधि में लगभग 25 से 30 हजार लगाकर लगभग 2 लाख रूपये लाभ कमा चुकी है। अभी वर्तमान में लगभग 300 मुर्गी तैयार है।
    किराना दुकान:-किराना दुकान का संचालन 03 वर्षों से दीदी के द्वारा ही किया जा रहा है, दुकान में प्रतिदिवस लगभग 1000 से 1500 रूपये की विक्रय हो रहा है।
    वेल्डिंग की दुकान:- निकिता दीदी द्वारा वेंल्डिग दुकान का भी संचालन किया जा रहा है, दुकान में वेल्डिंग करने के लिए कारीगर के रूप  में एक व्यक्ति को नौकरी पे रखी है, इस दुकान में खिडकी, दरवाजा, ग्रील एवं अन्य टुट-फूट सामग्री तैयार कर मासिक आय के रूप में 10 हजार से 15 हजार रूपये तक कमा रही है।
    भविष्य की सोच:- भविष्य की सोच रखते हुए दीदी ने कहा कि मै समूह के संस्थापक सदस्यों में से एक हॅू और मैंने इस समूह को आगे बढ़ाने के लिए काफी मशक्कत किया है, इसीलिए इस समूह एवं समूह के सदस्यों के प्रति मेरा लगाव अपने बच्चों के समान है। मैं अपने परिवार के साथ साथ समूह को ज्यादा समय देती हॅू और इसमें मेरे परिवार के समस्त सदस्यों की बेजोड़ भागीदारी का नतीजा है। इसीलिए वर्तमान में पूरे क्लस्टर में नई दिशा स्व सहायता समूह के जैसा सफल व सबसे अधिक आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने वाला समूह कोई भी नहीं है। मेरी भविष्य की सोच है कि मैं अपने समूह के 3-3 सदस्यों का समूह बनाकर उन्हे सामूहिक आर्थिक गतिविधियों से जोडू। इसमें हमारे समूह ने सोचा है कि हम अचार, बड़ी, पापड़ की अलग अलग इकाई स्थापित करेंगे। इसी तरह हम एक मशरूम उत्पादन केन्द्र की भी स्थापना करना चाहते हैं, इन समस्त गतिविधियों से जो भी लाभ होगा, उसका 10 प्रतिशत समूह में समूह का सहयोग लाभांश के रूप में जमा होगा तथा शेष 90 प्रतिशत लाभांश संबंधित इकाई के संचालक दल में वितरित किया जावेगा।

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छत्तरसिंग पटेल

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