छत्तीसगढ़

महांसमुद : जिले के अफसर और बच्चे जंगल में बैठकर चिडिय़ों के लिए घोसला बनाने का सीख रहे हुनर

वन चेतना केंद्र कोडार में प्रात: 10 बजे से कलेक्टर, एसपी, सीईओ, वन मंडल अधिकारी और जिले के कई बड़े अफसर और बच्चे आज जंगल में बैठकर चिडिय़ों के लिए घोसला बनाने का हुनर सीख रहे हैं। पेड़ की छांव में अपनी गौरैया के रहने के लिए ताना-बाना बुना जा रहा है। हाथों में तार और घास लेकर बेहद इत्मिनान ने घोंसला बनाने की हुनर सीख रहे बच्चे आज बहुत खुश नजर आ रहे हैं। स्कूली बच्चों का कहना है कि आंगन में, परछी में आकर दाना चुगने वाली अपनी गौरैया को हम खोना नहीं चाहते। उन्हें बचाना जरूरी है। अपनी बेहद प्यारी चिडिय़ा के लिए हम घोसला भी बनाएंगे और दाना-पानी की व्यवस्था भी करेंगे।

कलेक्टर निलेश कुमार क्षीर सागर, पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस आलोक बच्चों और शिक्षकों के साथ सहज भाव से घोसले बनने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का नाम मोर चिरैया है।
पक्षियों की अपनी अलग और अजीब सी दुनिया है। इनके रहने के अलग-अलग तरीके हैं। इनका घोसला एक तरह का नहीं बल्कि कई तरह का होता है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार इनके घोसलों के प्रकार दर्जन भर से ज्यादा हैं। अब इन सभी प्रकार के पक्षियों के घोसलों को बचाने के लिए जिलाधीश निलेश क्षीरसागर, वनमंडलअधिकारी पंकज राजपूत समेत पक्षी विशेषज्ञ, संरक्षक और शिक्षक कोशिशों में जुटे हुए हैं। दरअसल इसके लिए आज गुरूवार 3 मार्च को प्रात: वन चेतना केंद्र कोडार महासमुंद में मोर चिरैया कार्यक्रम का आयोजन किया गया है ।  अधिकारियों ने सोचा कि गर्मी का मौसम आ चुका है। अब नन्हें परिंदों की हिफाजत किया जाए।

इस तरह सभी ने मिलकर एक प्लान बनाया चिडिय़ों को बचाने का। नाम दिया मोर चिरैया। चिडिय़ों से बच्चों की आत्मीयता को भांपकर उन्हें भी इसमें शामिल कर लिया गया। इसी बहाने बच्चों से भी उम्मीद की जा रही है कि नन्हें परिंदों को बचाने के लिए ने भी भावनात्मक रूप से इस मुहिम में जुड़ें। इस प्लान को गति देने के लिए एक आमंत्रण पत्र भी वन विभाग ने छपवाया, सभी को आमंत्रित किया। स्कूली बच्चों को कार्यक्रम स्थल तक लाने-जाने की व्यवस्था हुई। जानकारी प्रशिक्षक बुलाया गया। और आज बच्चों के साथ जिले केआला अफसरों ने इस मुहम में ऊर्जा के साथ सहभागिता दर्ज कराई। जिले में यह पहला मौका है, बच्चों को प्रकृति से जोडऩे की कोशिशें हुई है। स्कूली बच्चों के साथ कलेक्टर के दोनों बच्चों और उनकी पत्नी भी इस महिम में शामिल हुईं और उन्होंने भी चिडिय़ों के घोंसला बनाने विधि सीखी। इस दौरान बच्चों को विशेष रूप से विद्यार्थियों को चिडिय़ों की सुरक्षा की जानकारी दी गई।

गौरतब है कि जिले के पूर्व कलेक्टर सुनील कुमार जैन गर्मी का मौसम शुरू होते ही कलेक्टोरेट और अपने बंगले में जगह-जगह पेड़ों पर चिडिय़ों के लिए दान-पानी की व्यवस्था करते थे। उनकी इस खास काम पर शहर के लोग भी अमल करते थे और गर्मी भर हर जगह चिडिय़ों को दाना और पानी दिया जाने लगा था। उनके तबादले के बाद यह परंपरा लगभग समाप्त हो गई थी। लेकिन अब एक नये आंदाज में घोसले बनाने के साथ यह परंपरा फिर से जी उठी है।

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छत्तरसिंग पटेल

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