जज्बे को सलाम : 67 बार हुआ फेल प्रयास, पर जुनून जारी रहा: लॉकडाउन में पढ़ा स्पेस सांइस, 9वीं के छात्रों ने बनाया 500 फीट तक जाने वाला रॉकेट

केंद्रीय विद्यालय के कक्षा 9 वीं में पढ़ने वाले हर्षित सिंह और उसके साथियों ने 500 फीट तक जाने वाले रॉकेट की लॉंचिंग की है। इंस्टाग्राम पर उनके इस इनोवेशन से प्रभावित होकर नेबुला स्पेस आर्गेनाइजेशन मैसूर ने उनसे संपर्क साधा है। हर्षित और उसके साथी आदर्श जंघेल, विषभ फोटानी, सत्यम साहू, लक्ष्मण ठाकुर, योगेंद्र ठाकुर, कौशलेश वर्मा,दुमेश चुरेंद्र ने कोरोना काल में घर मे रहते हुए स्पेस साइंस की ओर रुचि दिखाते हुए काम शुरू किया।
इन सभी ने मिलकर एक कंपनी बनाई जिसका नाम रखा इंडियन रिसर्च कंपनी ऑफ स्पेस। इसके बाद शुरु हुआ इनोवेशन का दौर। इन्होंने रॉकेट का निर्माण शुरु किया। काफी मशक्कत के बाद छात्रों ने एक ऐसा रॉकेट बनाया जो 500 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। छात्रों ने इसका सफल परीक्षण भी किया है। हर्षित सिंह ने बताया कि उनकी टीम कुछ और नए प्रयोग कर रही है। कुछ नए डिजाइन्स पर भी काम किया जा रहा है। 9 वी के छात्रों के इस इनोवेशन ने सभी को चौंका दिया है।
67 बार फेल हुआ प्रयास, पर जुनून जारी रहा
हर्षित ने बताया कि उनकी टीम ने साल 2020 से रॉकेट बनाने का काम शुरु किया । लेकिन करीब 67 बार ऐसा हुआ जब उनका प्रयोग असफल रहा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिर बेहतर ढंग से स्पेस साइंस की पढ़ाई की और दोबारा अपने काम में जुटते रहे। अपनी नियमित पढ़ाई के अलावा उन्होंने रॉकेट बनाने के लिए भी समय निकाला। तब जाकर उन्हें यह सफलता मिली। हर्षित ने बताया कि उन्होंने और उनकी टीम के दोस्तों ने पूरी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से जुटाई।
सोशल मीडिया में देख यू-ट्यूब चैनल ने भी दिया ऑफर
हर्षित और उसके साथी अभी टीवीसी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन्होंने एक ऐसा रेडियो टेलिस्कोप बनाया है। जिससे ऑफिशियल सेटेलाइट को ट्रैक किया जा सकता है। हर्षित और उसकी टीम राकेट लॉंचिंग करते समय सेफ्टी का भी पूरा ध्यान रखते हैं।और सभी राकेट इग्निटर से ही लांच करते हैं। उन्होंने बताया कि अपने रॉकेट के सफल परीक्षण की पूरी जानकारी और विडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। जिसके बाद पॉपुलर यू-ट्यूब चैनल द मडी शो ने भी उनके इस इनोवेशन के संबंध में अपने चैनल आमंत्रित किया है। द मडी शो अंतरिक्ष से संबंधित जानकारियों का प्रोग्राम है।
लो बजट रॉकेट बनाने की सोच, मस्क से हैं प्रभावित
हर्षित और उसके साथी अमेरिका के निजी स्पेस एजेंसी इलोन मस्क से प्रभावित रहे हैं। मस्क की तुलना विश्व के सर्वाधिक अमीरों में होती है। और उनका मानना है कि भारत को स्पेस साइंस में अभी और विकास कर सकता है । हर्षित, आदर्श और सत्यम ने बताया कि वे लो बजट राकेट बनाना चाहते हैं। और इंडियन स्पेस प्रोग्राम को और विकसित देखना चाहते हैं। टीम ने पहला रॉकेट टीएम 1 बनाया। दूसरा गरुण और तीसरे रॉकेट को बटर फ्लाई का नाम दिया।
























