महासमुंद : सरपंच संघ 13 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

सरपंच संघ शुक्रवार से 13 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया है। सरपंच संघ मुख्यालय स्थित पटवारी कार्यालय के पास धरनारत है। सरपंच संघ के ब्लॉक अध्यक्ष विरेन्द्र चंद्राकर ने बताया सरकार से लगातार मांग करते आ रहे है, लेकिन मांगों पर विचार नहीं किया। इसलिए सभी सरपंचों ने एकमत होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने का फैसला लिया था। इसी फैसले के साथ शुक्रवार से निश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए है।
बता दें कि सरकारी अधिकारी कर्मचारी के बाद अब सरपंच संघ भी हड़ताल में चले जाने से लोगों को एक बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। सरपंचों से हस्ताक्षर कराने के लिए लोगों को भटकना पड़ेगा। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी कामकाज प्रभावित हो गया है। सरपंच संघ अध्यक्ष ने बताया कि मांग में सरपंचों और पंचों के मानदेय में वृद्धि कर 20 से 5 हजार किया जाए। सरपंचों को पेंशन 10 हजार रुपए दिया जाए, 50 लाख तक सभी कार्यों में कार्य एजेंसी पंचायत को बनाया जाए।
सरपंच निधि के रूप में 10 लाख रुपए दिया जाए, नक्सलियों के हमले में सरपंचों को मारे जाने पर 20 लाख की आर्थिक सहायता दी जाए। 15वें वित्त की राशि को अन्य मदद में अभिषरण नहीं किया जाए। 15वें वित्त की राशि जनपद व जिला सदस्य द्वारा अपने ही क्षेत्र में दिया जाए। नरेगा सामग्री राशि भुगतान हर तीन महीने में किया जाए। नरेगा निर्माण कार्य में 40 प्रतिशत अग्रिम राशि दी जाए। सरपंचों व पंचों का कार्यकाल दो वर्ष बढ़ाया जाए। ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास की राशि 2 लाख करते हुए तत्काल राशि जारी की जाए। सरपंचों के अविश्वास प्रस्ताव अधिनियम और धारा 40 में संशोधन किया जाए।
संविदा कर्मचारियों ने उठाई नियमितीकरण की मांग
संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने प्रांतीय आह्वान पर प्रदर्शन किया। ये सभी पटवारी कार्यालय में एकत्र हुए और कलेक्टोरेट पहुंच अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री के नाम छग सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले डिप्टी कलेक्टर एसके टंडन को ज्ञापन सौंपा।
अभिषेक शर्मा, रामगोपाल खूंटे, डॉ देवेन्द्र साहू, सुरेंद्र चंद्राकर, योगेश चंद्राकर, राजेश साहू ने बताया कि ने बताया कि संविदा कर्मचारियों के समस्याओं से मुख्य सचिव, छग शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, सचिव, वित्त विभाग एवं विभागीय योजनाओं के प्रमुखों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया है, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं नियमितीकरण भी मांगों में प्रमुख रूप से शामिल है।




















