सरायपाली

जानें गर्भावस्था में शिशु के एनोमली स्कैन कितना महत्वपूर्ण… सराईपाली – बसना में एक मात्र भारती हॉस्पिटल में एनामली स्कैन की सुविधा उपलब्ध

एनॉमली स्कैन क्या है? और कितना जरूरी है जानें...

स्वास्थ्य सेवाएं@सरायपाली। एनॉमली स्कैन गर्भ में पल रहे बच्चे का प्लेसेंटा की स्थिति का पता लगाते है और बच्चे के विकास की सम्पूर्ण जानकारी देता है.

अब भारती हॉस्पिटल सरायपाली में सीनियर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कुलदीप वशिष्ट MD DMRD DNB (Radiodiagnosis) उपलब्ध हैं जहां पर आप उचित परामर्श एंव एनामली स्कैन करा सकते हैं।

एनॉमली स्कैन से निम्न जानकारी मिलती है

• आपका शिशु किस तरह बढ़ रहा है और गर्भ में उसकी हलचल देखना विकसित हो रहे हैं

सुनिश्चित करना की शिशु के आतंरिक अंग सही प्रकार से

शिशु में कुछ विशिष्ट जन्म दोषो का पता लगाना

एमनियोटिक द्रव की मात्रा का अनुमान लगाना

• गर्भ नाल की जाँच करना और अपरा की स्थिति की देखना

गुड़सूत्र (क्रोमोसोम) सम्बंधित असामान्यताओं के मार्कर की जाँच करना

• आपकी ग्रीवा की जाँच और प्रसव नलिका की मापना

• गर्भाशय तक रक्त के प्रवाह को देखना

उक्त सारी जानकारी एंव पंजीयन के लिए भारती हॉस्पिटल सरायपाली जिला – महासमुंद (छ.ग.) में करा सकते हैं।

भारती हॉस्पिटल में यह सुविधा प्रतिदिन उपलब्ध है आप निम्न नम्बरों से संपर्क कर सकते हैं।

संपर्क – 7773000720, 8120226666

 

एनॉमली स्कैन क्या होता है?

यह गर्भावस्था की दूसरी तिमाही का सबसे महत्वपूर्ण स्कैन होता है। मध्य-गर्भावस्था के इस स्कैन में गर्भस्थ शिशु और आपके गर्भाशय की नजदीकी जांच की जाती है। यह स्कैन 18 से 20 हफ्ते की गर्भावस्था के बीच किया जाता है।

इस स्कैन का मुख्य मकसद यह जांचना है कि शिशु का विकास सही ढंग से हो रहा है या नहीं और अपरा (प्लेसेंटा) कहां पर स्थित है।

आपको एनॉमली स्कैन की जरुरत क्यों है?

आप गर्भावस्था का आधा चरण पार कर चुकी हैं और इस समय तक आपके शिशु के अधिकांश जरुरी अंग विकसित हो चुके हैं। सभी गर्भवती महिलाओं को इस स्तर पर स्कैन करवाना होता है, ताकि अगर किसी समस्या का पता चले, तो उसके लिए जरुरी एहतियाती कदम उठाए जा सकें।

डॉक्टर शिशु के सभी अंगों की जांच करेंगे और माप लेंगे। इस स्कैन से निम्नांकित बातों का पता चल सकता है:

  • आपका शिशु किस तरह बढ़ रहा है और गर्भ में उसकी हलचल देखना
  • सुनिश्चित करना कि शिशु के आंतरिक अंग सही प्रकार से विकसित हो रहे हैं
  • शिशु में कुछ विशिष्ट जन्म दोषों का पता लगाना
    एमनियोटिक द्रव की मात्रा का अनुमान लगाना
  • गर्भ नाल की जांच करना और अपरा की स्थिति को देखना
  • गुणसूत्र (क्रोमोसोम) संबंधी असामान्यताओं के मार्कर की जांच करना
  • आपकी ग्रीवा की जांच और प्रसव नलिका को मापना
  • गर्भाशय तक रक्त के प्रवाह को देखना आदि।

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काका खबरीलाल

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