छत्तीसगढ़

किसानों के लिए लाभकारी फसल चक्र परिवर्तन

किसान अब परंपरागत धान की खेती के बजाय चना, मूंग और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों की खेती को अपनाने लगे हैं। धमतरी जिले के किसानों ने इस बार गर्मी के मौसम में फसल विविधिकरण की जो नई राह अपनाई है, इसका फायदा उन्हें सीधे तौर पर मिल रहा है। कम लागत, कम पानी में अधिक मुनाफा।

भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण जिला प्रशासन ने किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। गांव-गांव में जल संरक्षण के लिए जल-जगार महोत्सव और फसल चक्र परिवर्तन शिविर आयोजित किए गए। इन प्रयासों का असर यह हुआ कि किसानों ने इस बार धान की जगह चने की खेती की, जो कम पानी में अच्छी पैदावार देती है।

किसानों को उनकी मेहनत का फल भी मिल रहा है। सरकार द्वारा पहली बार चना की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है। 1 मार्च से 31 मई तक 5650 रूपए प्रति क्विंटल की दर से चना खरीदी हो रही है। धमतरी जिले में 8 समितियों के माध्यम से 2144 किसानों ने अब तक 19 हजार 850 क्विंटल चना बेचा है, जिसकी कुल राशि 11 करोड़ 21 लाख 53 हजार रूपए है। भुगतान भी सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है।

अमलडीह के किसान भुनेश्वर साहू बताते हैं कि धान की तुलना में चना की खेती से पानी भी बचा और मुनाफा भी मिला। पैसा भी समय पर मिल गया है। वहीं किसान घुरसिंह साहू ने कहा, मुझे 56 हजार रुपये से ज्यादा की राशि सीधे खाते में मिली है। पहली बार शासन ने चना खरीदी की है, जिससे हम किसानों को बहुत लाभ हुआ है।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि फसल चक्र परिवर्तन से भूजल स्तर को बचाने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल रही है। धान की जगह चना, मूंग, सरसों जैसी फसलें लगाने के लिए किसानों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही इन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी और अन्य सरकारी सहायता भी दी जा रही है। धमतरी में किसानों का यह बदलाव अब एक सफलता की कहानी बन चुकी है। इससे यह साबित होता है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत एक साथ मिल जाएं, तो खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

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काका खबरीलाल

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