सरायपाली

सरायपाली: इस नाला में बने पुल से आवागम शुरू

सरायपाली से लगभग 30 किलोमीटर दूर ओड़िसा सीमा के प्रथम गाँव लखमरा से लगे अंग नदी पर वर्षों बाद पुल निर्माण प्रारम्भ हो जाने से सीमावर्ती दोनों राज्यों के ग्रामीणों व व्यापारियों में हर्ष की लहर है । इस पुल का निर्माण अपने निर्धारित समय में पूर्ण कर लिया गया है । इस बहुप्रतीक्षित व सुगम व्यापार व आवगमन को ध्यान में रखते हुवे इस अंग नदी के आसपास रहने वाले ओडिसा व छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधियों , व्यापारी संघ व संगठनों , बस , ट्रक व वाहन संगठनों द्वारा काफी वर्षों से इस नदी पर पुल निर्माण की मांग की जा रही थी । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भी इसकी पहल की गई थी किंतु विभिन्न कारणो वश यह मांग पूरी नही हो पा रही थी । अंग नदी के तट पर बसे ग्राम लखमरा जिसके नाम से उस नदी व पूल को पहचाना जाता है के युवा रमेश बारीक ने बताया कि 2014 में पूल निर्माण हेतु ग्राम चरढापाली में धरना , प्रदर्शन व हड़ताल का आयोजन किया गया था व प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौपा गया था ।

पदमपुर के वर्तमान विधायक वर्षारानी बरिहा के पिता व तत्कालीन बीजेडी विधायक स्व . विजय रंजन सिंह बरिहा व ग्रामीण उन्नयन मंत्री व भटली के विधायक रहे सुशांत सिंह द्वारा इस पूल निर्माण के लिए भूमिपूजन 04/11/2022 को किया गया था । तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा इन जनप्रतिनिधियों की मांग पर 18,55,56,301 रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी । वर्तमान नवनिर्मित पूल लंबाई 227.5 मीटर व चौड़ाई 7.50 मीटर है । यह पुल पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो चुका है व आवागमन भी आरम्भ हो गया है

यह पुल व्यावसायिक , व्यापारिक , राजनैतिक , आवागमन के लिए काफी महत्वपूर्ण मुद्दा था पर पता नही क्यों इसका विधिवत उद्घाटन क्यों नही किया गया । अपनी सरकार के इस उपलब्धि को सार्वजनिक किए का अवसर क्यों खो दिया यह समझ से परे है ।इस पुल के आरंभ हो जाने से दोनों राज्यों के व्यापारियों , व्यवसायियों , कृषकों , वाहन चालको , ट्रक व यात्री बसो आदि को बेहतर यातायात व व्यापारिक सुविधा मिल सकेगी।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही छत्तीसगढ़ व ओड़िसा सीमा से लगे ग्राम लखमरा के किनारे से एक चौड़ी नदी जिसे अंग नदी के नाम से जाना जाता है बहती है । इस नदी की चौड़ाई 100 मीटर होगी । इस पुल पर 12 महीने पानी बहता है । गर्मी के 4 माह ग्रामीणों द्वारा अस्थाई रपटा बना देने से आवागमन की राहत मिल जाती है शेष 8 माह इस नदी को पार कर जाना जान जोखिम में डालने जैसा होता है ।
ओडिशा के पदमपुर से सरायपाली की दूरी मात्र 38 किलोमीटर है । दोनों नगरों के बीच व्यपारिक व सामाजिक संबंध बहुत प्रगाढ़ है । राज्य के सीमाओ में दोनों नगर बसे होने के कारण इनका व्यवसायिक व व्यापारिक महत्व बहुत बढ़ जाता है ।किंतु लखमरा नदी के नाम से पुकारे जाने वाले इस नदी पर स्थायी पुल के नही होने से लगभग 8 माह आवागमन पूरी तरह प्रभावित होता था ।इस नदी पर पुल निर्माण किये जाने की मांग ओड़िसा के साथ साथ छत्तीसगढ़ के सीमा पर स्थित सरायपाली व बसना के व्यापारी संगठन , सामाजिक संघ व संगठनो , व बस , ट्रक संघो द्वारा भी पिछले कई वर्षों से ओडिशा व छत्तीसगढ़ की सरकार के साथ साथ निर्वाचित प्रतिनिधियों से भी कई बार की जाती रही है । सरायपाली
विधानसभा के पूर्व भाजपा विधायक त्रिलोचन पटेल द्वारा केंद्रीय सड़क योजना के तहत बलांगीर ( ओड़िसा) से रांची ( झारखंड ) सड़क निर्माण की पहल भी की गई थी

। इस पुल को वन वे की तर्ज पर बनाया जा रहा है ताकि आने जाने के रास्ते अलग हों । नदी से काफी ऊपर पुल निर्माण होने से भारी बरसात में भी आवागमन प्रभावित नही होगा ।
इसके साथ ही सरायपाली सीमा से पदमपुर तक सड़क चौड़ीकारण का कार्य भी आरम्भ है ।

इस सड़क व पुल के निर्माण हो जाने से दक्षिण ओडिशा के पदमपुर , बलांगीर , काटबांजी ,टिटलागढ़ , पटनागढ़ के साथ ही रायगड़ा व विशाखापत्तनम का सीधा सड़क संपर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ , जशपुर झारखंड व उत्तर प्रदेश से हो जायेगा । वही इन नगरों से बसों की सुविधा भी प्रारम्भ हो जाने से यात्रियों , धर्मप्रेमियों व व्यापारियों के साथ ही पर्यटन को भी लाभ मिलेगा । इस सड़क मार्ग पर ओड़िसा स्थित नृसिंगनाथ , हरिशंकर , देवदरहा व पतोरा धार्मिक का संपर्क भी सीधा हो जाने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा । पूल निर्माण के बाद अब इस मार्ग पर बसों के आवागमन की प्रारंभिक शुरुवात हो चुकी है जो आने वाले समय मे सरायपाली से बलांगीर व काताबांजी तक सीधे बस सुविधा मिलनी प्रारम्भ हो जायेगी। छत्तीसगढ़ सीमा से लखमरा सीमा तक लगभग 10 किलोमीटर सड़को के चौड़ीकरण का कार्य भी 2-3 नाश ने पूर्ण होने की संभावना बताई गई है ।

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काका खबरीलाल

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