जिस 96 वर्षीय माँ ने बचपन मे सम्पत की उंगली पकड़कर चलना सिखाया, आज उसी माँ के हाथ पकड़कर सम्पत ने मंच तक लाया फिर चरण स्पर्श कर किया सम्मान

शुकदेव वैष्णव, काकाखबरीलाल। नीलांचल सेवा समिति के तत्वाधान में सेवा, सम्मान और संरक्षण की पवित्र उद्देश्य को लेकर आयोजित सेवा समर्पण यात्रा का आयोजन आमाभौना, कुरचुंडी(केहरपुर), कपसाखुंटा एवं मेदनीपुर में हुआ. यात्रा के दौरान ग्रामीणों द्वारा नीलांचल सेवा समिति के संरक्षक श्री सम्पत अग्रवाल जी का भव्य कीर्तन मंडली के अगवानी में एवं पुष्प माला पहनाकर स्वागत किया गया।

सेवा और सम्मान के इस पवित्र यात्रा में सम्पत अग्रवाल ने माता नव दुर्गा स्वरूप छोटी-छोटी कन्याओं का पद पूजा कर का चरण वंदन किया, हमारे नए पीढ़ी को ज्ञान प्रदान करने वाले गांव के बड़े बुजुर्गों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया, इनके साथ ही ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे जो अपने पूर्व कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर अपने गांव व अंचल के नाम गौरवान्वित करने वाले को भी मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। अंचल के 25000 से अधिक कीर्तन मंडलियों के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।

सेवा समर्पण यात्रा के मध्य ग्राम आमाभौना में सम्पत अग्रवाल बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान कर रहे थे. इस बीच उनकी मुलाकात एक बुजुर्ग महिला से हुई, जो बचपन में सम्पत अग्रवाल को अपने सुपुत्र के समान लालन पालन करती थी. और अपने हाथों से भोजन खिलाती थी जिसे देखकर सम्पत अग्रवाल को बहुत खुशी हुई, जब बचपन मे सम्पत अपने छोटे-छोटे उंगलियों से उनका हाथ पकड़ कर चलना सीखा है और वही सम्पत आज बुजुर्ग श्रीमती पुनई बाई दास जोकि 96 वर्ष की है, उस बुजुर्ग महिला के हाथ पकड़ कर सम्पत ने कार्यक्रम स्थल तक लाया और शाल एवं श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया, बुजुर्ग महिला आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि जिस बच्चे को अपने समक्ष बड़ा होते देखा है आज वही छोटा बच्चा मेरे साथ अंचल के सभी गांव में जा कर सभी बुजुर्ग लोगों को सम्मान देकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है मुझे गर्व है कि सम्पत मेरा पुत्र है मां और पुत्र दोनों अपने बीते हुए दिन को याद कर उनका ह्रदय गदगद हो गया और आंखों से आंसू छलकने लगा।
























