सरायपाली : सड़क निर्माण अधूरा…. तालाब मेढ़ से भारी वाहन लेने को मजबूर ग्रामीण


एक ओर तो शासन के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने, गांवों में पक्की सड़क बनाने आदि विकास से संबंधित कई योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन ग्रामीण अंचलो में इन योजनाओं का बंटाधार होते हुए देखा जा सकता है। विकासखंड, अंतर्गत ग्राम राजाडीह पंचायत के आश्रित ग्राम भालूकोना के लोगों को सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। डिजिटल युग में आज भी विकास के दौर में यह गांव काफी पिछडा़ नजर आ रहा। ग्राम जटाकन्हार, पझरापाली, बेलडीह के ग्रामीण रोशन भास्कर, धनेश्वर भास्कर, प्रेमबहादुर, फगुलाल पारेश्वर, नत्थुलाल सिदार, मानसिंह राय, रामप्रसाद सिदार, पुनीतराम गढ़तिया, हरिशंकर नेटी, प्रभुलाल ओगरे, फुलसाय डडसेना, सरेन्दर डडसेना, सियादास भास्कर, चीतल सिंह सिदार आदि ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राजाडीह से भालूकोना, पझरापाली रोड तक सड़क बननी थी। कार्य प्रारंभ हुए लगभग 5 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन आधा अधूरा सड़क बनाकर कार्य को छोड़ दिया गया है। वहीं बीच में दो पुलिया भी बनना था, वहां भी पुल को गिराकर छोड़ दिया गया है।
तालाब मेढ़ से भारी वाहन लेने को मजबूर ग्रामीण ग्रामीणों ने कहा कि आगामी 1 नवम्बर से धान खरीदी शुरू हो जाएगी। सीजन में प्रतिदिन कई टेªक्टर धान बोरा लोड करके भालूकोना के छोटी गलियों से होकर जाते है, जिसमें पहले एक जर्जर पुलिया को पार करते हैं, फिर तालाब के मेढ़ से खतरे से होकर बचकर आगे जाते है। जबकि तालाब के मेढ़ से अगर थोड़ा सा भी संतुलन बिगड़ा तो जान माल का नुकसान होने की संभावना है। परंतु विभाग को इस खतरे का जरा भी अंदाजा नहीं है। सैकड़ों ग्रामीण, माल वाहक एवं चारपहिया वाहनों से कई वर्षों से इसी रास्ते से ही जाते हैं। वहीं कुछ ग्रामीण इस रास्ते से डरकर ओड़िसा वाले रास्ते से होकर भी जाते हैं। हालांकि वह रास्ता सुगम है परंतु दूर है और अलग राज्य होता है। इसलिए ग्रामीणों को इस रास्ते में आने जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आस-पास के ग्राम पझरापाली, जटाकन्हार, बेलडीह के ग्रामीणोम को भी जंगलबेड़ा धान खरीदी केन्द्र में धान बेचने के लिए इसी रास्ते से ही होकर जाना पड़ता है। सड़क नहीं बनने से लोगों को हो रही परेशानी भालूकोना के ग्रामीण राधमन सिदार, रसीको प्रधान, अखिलेश प्रधान, जसवंत प्रधान, दीपक प्रधान, जयकृष्ण प्रधान, खिरोद्र निर्मलकर, भागीरथी यादव, विरेन्द्र प्रधान, बालेश्वर सिदार, जलंधन सिदार आदि ने कहा कि बारिश के दिनों में तालाब के मेढ़ के उपर से कच्ची सड़क फिसलन भरी हो जाती है। कीचड़ से सने रास्ते को पार करना काफी कठिन होता है। वहीं पुल नहीं होने से नाला उफान पर होता है और आवाजाही बाधित रहती है, जिससे जन जीवन प्रभावित होता है। नाले में पुल नहीं बनने से बरसात में गांव का सम्पर्क मुख्यालय से टूट जाता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरात लोगों को मुख्य सड़क से जोड़ना है, लेकिन राजाडीह से भालूकोना सड़क निर्माण कार्य की गति थम गई है। अधिकारियों को इसकी जानकारी होगी भी या नहीं, यह भी समझ से परे है। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम भालूकोना में विभाग या ठेकेदार की लापरवाही से तालाब के एक छोर पर आधा रोड बनाकर छोड दिया गया है। वहीं तालाब के दूसरे छोर पर रोड बनाकर छोड़ दिया गया है। रास्ते में दो पुलिया बनना था वहां भी पुल को गिराकर छोड़ दिया गया है और पुलिया नहीं बनाया गया है। सड़क को ऐसे बनाया गया है जैसे मानो रोड वहां खतम हो गया है और आगे नहीं जाएगा। भालूकोना गांव के पीछे पझरापाली रोड तक सड़क को आगे बनाकर छोड़ना था, लेकिन गांव के पीछे तक ही आधा अधूरा छोड़ दिया गया है जहां लोगों को रोड दिखाई भी नहीं देता।

























