सरायपाली : मिर्च की खेती कर गजपति ले रहे हैं अच्छी आमदनी आज के युवाओं के लिए है प्रेरणास्रोत

सरायपाली। वर्तमान में मिर्च की खेती किसानों के लिए एक बेहतर आय का जरिया बन गई है. इसमें सफलता मिलता देख अब कई किसान पूरे साल सिर्फ मिर्च की खेती करके ही मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. सरायपाली विकासखण्ड के सिंघोड़ा क्षेत्र में स्थित ग्राम तिहारीपाली में बड़ी संख्या में किसान हरी एवं काली मिर्च की खेती कर रहे हैं. भारत में मसालों में मिर्च का विशेष महत्व है, जिससे किसान साल में लाखों का मुनाफा कमाते हैं. तिहारीपाली के एक किसान गजपति विशाल ने 6-7 साल पहले एक दूसरे की देखा देखी में पारंपरिक खेती से हटकर मिर्च उत्पादन को व्यवसाय के रूप में चुना था. इसके बाद से यहां के 25-30 किसानों ने इसी मिर्च की खेती को कमाई का जरिया बना लिया है। किसानों ने बताया कि ओड़िसा से व्यापारी आते हैं और मिर्च की जितनी भी तुड़ाई हुई होती है, उसे तौलकर रकम देकर ले जाते हैं। उनके यहां की मिट्टी भी मिर्च की खेती के लिए उपजाऊ और अच्छे पानी के निकास वाली है, इसीलिए इस क्षेत्र में मिर्च की अच्छी पैदावार मिल जाती है। आधे एकड़ में 20 से 25 क्विंटल तक उत्पादन यहां के किसान गजपति विशाल ने बताया कि शुरुआत से ही कृष्णा काली मिर्च के बीजों से खेती की थी, जिससे आधे एकड़ में एक सीजन में लगभग 20 से 25 क्विंटल काली मिर्च का उत्पादन हो जाता है। मूल्य बाजार मूल्य के हिसाब से एक सीजन में 70 से 80 हजार रूपये की कमाई हो जाती है। वे इसे कई वर्षों से कर रहे हैं. अच्छे उत्पादन के लिए वे समय-समय पर कीटों से बचाव, उत्तम बीजों का चयन, खरपतवार नियंत्रण और खाद डालते रहते हैं। उन्होंने बताया कि खेत तैयार करने के लिए खाद डालकर करीब तीन से चार बार जुताई करते हैं. बीज बोने से 20 दिन पहले खाद डालने का काम आवश्यक मात्रा के अनुसार करते हैं. मेड़दार खेत तैयार करने के साथ ही 60 सेंटीमीटर दूरी पर मेड़ की नालियां तैयार करते हैं. पौधे निकलने के बाद हानिकारक कीटों से बचाव के लिए वे समय-समय पर बाजार में मिलने वाली आवश्यक दवाओं का इस्तेमाल करते रहते हैं. फल आने पर ज्यादातर फल छेदक कीट मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने बताया कि 10 ग्राम बीज 10 डिसमिल में बोते हैं तो उन्हें लगभग 2000 रू का खर्च आता है, जिसमें खाद, कीटनाश दवाई आदि शामिल होते हैं। किसान ने बताया कि 60 दिनों में तैयार होने वाली फसल में करीब 30-40 डिसमिल के लिए उन्हें 6-7 हजार रूपए खर्च आता है। वहीं मिर्ची का बाजार भाव थोक रेट में 20, 30, 40 होते रहता है। जिससे वे करीब 60 से 70 हजार की कमाई कर लेते हैं। पौधांे में से मिर्ची निकलने में 2 महीने का समय लग जाता है। मिर्च के बाद दूसरी बार में लगाते हैं अलग फसल किसानों ने बताया कि जिस खेत में एक बार मिर्ची की खेती करते हैं उस खेत में दूसरी बार अलग फसल की बुआई करते है। जिससे मिट्टी की उर्वरता खत्म नहीं होती। अगर उसी खेत में दोबारा मिर्ची की खेती करते है तो मिर्ची का उत्पादन कम होता है। इस कारण वे उस खेत में लाल भाजी, आलू, प्याज एवं अन्य फसल का उत्पादन करते हैं और मिर्ची को दूसरे खेत में लगाते हैं। साथ ही मिर्ची की विटामिन के लिए जो दवाई डालते हैं, वह भी सरायपाली के बाजार में उपलब्ध नहीं रहती है, इसके लिए उन्हें दूसरे राज्य ओड़िशा जाकर दवाई लानी पड़ती है।

























