छत्तीसगढ़

जिले के वनांचल गांवों में दूरसंचार कनेक्टिविटी नहीं होने से हर वर्ग परेशान

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के वनांचल गांवों में दूरसंचार कनेक्टिविटी नहीं होने से हर वर्ग परेशान है। कोरोना काल में जहां छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित होना पड़ रहा हैं, वहीं कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस विभाग भी खासे परेशान हैं। यही नहीं स्वास्थ्यगत इमरजेंसी में भी ग्रामीणों को 102 और 108 एम्बुलेंस की मदद नहीं मिल पाती। ऑनलाइन संबंधी मामूली कार्यों के लिए उन्हें नगरी ब्लॉक व जिला मुख्यालय धमतरी तक सफर करना पड़ता है।उल्लेखनीय है कि देश को आजादी मिले 75 वर्ष बीत गए, लेकिन राजधानी रायपुर के निकट में होने के बावजूद धमतरी जिला शत-प्रतिशत दूरसंचार कनेक्टिीविटी से लैस नहीं हो सका। आज भी नगरी-सिहावा के दर्जनभर से ज्यादा गांवों में दूरसंचार की सुविधा नहीं हैं। मोबाइल यहां काम नहीं करता। सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकांश गांवों के लोगों तक इंटरनेट सुविधा नहीं पहुंच सकी है।
यहां के लोग डिजिटल दुनिया से अब भी वंचित हैं। खासकर यहां के ग्राम भैंसामुड़ा, रावनडिग्गी से लेकर खल्लारी, एकावारी तक एक बड़े एरिया में दूरसंचार कनेक्टिविटी नहीं है, जबकि सीतानदी टाइगर रिजर्व के तहत यह धूर नक्सल प्रभावित हैं। यहां के हजारों ग्रामीण अब भी देश-दुनिया की डिजिटल खबरों से अनजान है।

खबरों के लिए यहां के लोग पूरी तरह से अखबारों और किसी-किसी गांव में टेलीविजन पर आश्रित हैं। ऐसे में नगरी का वनांचल क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं के लिए पिछड़ गया है। वनवासी मनराखन नेताम, सूभेलाल ध्रुव, सुदर्शन नेताम का कहना है कि दूरसंचार का साधन नही होने से ग्रामवासी अपनी बातो को शासन-प्रशासन तक उचित माध्यम से पहुंचा नहीं पाते।
सर्वे के बाद नहीं हुआ काम
बताया गया है कि वनांचल में मोबाइल टावर लगाने के लिए अब तक कई कंपनियों की ओर से सर्वे किया जा चुका है, लेकिन अब तक टावर नहीं लगा है। अब फिर से गत दिनों जियो कंपनी के अधिकारियों ने यहां जबर्रा, माडमसिल्ली, बांसपारा, भैंसामुड़ा, घोरागांव, फरसगांव और भिरागांव में नेटवर्क की सुविधा के लिए सर्वे किया है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से भी हरी झंडी मिलने की बात कही जा रही है। अब देखना है कि यहां नेटवर्क कनेक्टिविटी हो पाता है या फिर सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने विवश होंगे।

घुटकेल के पूर्व बीजू मरकाम ने बताया कि टाइगर रिजर्व के अधिकांश गांवों में स्वास्थ्यगत इमरजेंसी के समय एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाती। नेटवर्क की सुविधा नही होने से वे इमरजेंसी में 102 और 108 एम्बुलेंस को खबर नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में मरीजों को गांव से ट्रैक्टर या फिर बाइक के सहारे नगरी अस्पताल तक लाना पड़ता हैं। बारिश के दिनों में तो और भी दिक्कत बढ़ जाती है।
पुलिस के लिए बढ़ी परेशानी
वनांचल में नेटवर्क का अभाव पुलिस विभाग के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। घटना-दुर्घटना के समय पुलिस को जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में फौरी तौर पर उन्हें मदद नहीं मिल पाती। वहीं नक्सल मोर्चे पर विशेष सर्चिंग के दौरान भी पुलिस फोर्स को आसपास थानों और आला अधिकारियों से कनेक्टिीविटी में परेशानी होती है। एकमात्र वायरलेस ही दूरसंचार का माध्यम होता हैं।

जियो कंपनी अधिकारी अभय थिटे ने कहा, जिले के वनांचल के गांवों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया है। यहां कुछ प्रमुख गांवों में जल्द ही मोबाइल टावर लगाया जाएगा।

 

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छत्तरसिंग पटेल

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