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जनकल्याण मे रूचि नही,कमीशन खोरी मे सिमट गये है जनसेवक

- सारंगढ से ओमकार केशरवानी की रपट – सारंगढ क्षेत्र मे अपने आप को जनसेवक समझने या कहलाने वाले नेताओ को जनकल्याण के कार्यो मे कोई रूची नही है ना ही ये नेता जरूरत मंदो के काम को कराने कोई रूची ले रहे है.ये जनसेवक लोग केवल पैसा कमाने मे रूची ले रहे हैं.पिछले दस – बारह वर्षो से सारंगढ क्षेत्र मे कमीशन की हाय तौबा मची हुई है शासकिय विकास कार्यो मे बीस से पच्चीस प्रतिशत कमीशन का खेल एक सुनिश्चित सेटिंग के तहत चल रही है चाहे विभागीय काम हो या गांव के विकास का काम हो बीस से पच्चीस प्रतिशत कमीशन का खेल यहां के जनसेवक खुलेआम कर रहे है.दो तीन जनसेवक तो ऐसे है जिनके कमीशन के खेल की चर्चाएं यहां क्षेत्र मे आये दिन हो रही है ये जनसेवक साहब लोगो की कमीशन दुकान मस्त चल रही है करीबीयो की माने तो दस बारह वर्षो मे ही इस दुकान के जरिये ये लोग करोड़पती बन गये हैं।क्षेत्र मे कोई बड़े नेता आते है तो उनके आस-पास रहकर बड़े नेताओ के सामने अपने आप को सक्रिय बताते है उसके बाद फिर से उसी कमीशन सेटिंग मे मशगूल हो जाते है.इन्हे जनकल्याण या लोगो के परेशानी समस्याओ से कोई मतलब नही रहता,हमारे क्षेत्र के जनसेवको का यह कारनामा आगामी विधानसभा चुनावो मे सत्तापक्ष के लिये घातक हो सकती है,क्षेत्र के लोग इनके इस काम से क्षुब्ध है ऐसे मे चुनाव के वक्त जब ऐसे जनसेवक जनता के समक्ष जायेंगे तो इनके प्रति जनमानस का गुस्सा फूटकर सामने आयेगा और निश्चित रुप से यह गुस्सा सत्तापक्ष के चुनावी परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा। जो सत्तापक्ष के लिये नुकसान दायक है। कुल मिलाकर इस संबंध मे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओ को अगर चुनाव मे फिर से जीत का परचम लहराना है तो सारंगढ विधानसभा क्षेत्र मे उक्त कारगुजारी को बंद करने कोई ठोस कार्यवाही करना चाहिये।राजनीतिक पंडितो का भी मानना है कि अगर कमीशन खोरी कारगुजारी को रोकने भाजपा ने कोई ठोस कदम नही बढ़ाया तो यह सीट उसके झोली से निकलना तय है।
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