रायपुर

वैश्विक कोरोना महामारी में छतीसगढ़ का एक ऐसा कैफे जहां सिर्फ दिव्यांग करते हैं काम, यहां स्वाद ही नहीं, इंसानियत परोस कमा रहे नाम

रायपुर. वैश्विक महामारी के बीच जब सभी क्षेत्र में कालाबाज़ारी, मुनाफ़ाख़ोरी जारी है. मेडिकल क्षेत्र में सांसों की सौदेबाजी चल रही. जहां मानवता तार-तार हो रहा है, रिश्ते बिखर रहे हैं. ऐसे में राजधानी के एक युवक ने व्यापार में मानवता दिखाते हुए ऐसे लोगों को संभाल रखा है, जिनके प्रति हमारी संवेदनाएं उभर जाती हैं, लेकिन हम उन्हें अपने घर में नहीं ले जाते हैं. उन्हें व्यापार में जगह नहीं देते, क्योंकि जानबूझ कर रिस्क लेना नहीं चाहते हैं. ऐसे स्थिति के बावजूद लॉकडाउन के बीच एक युवक दिव्यांग लोगों को काम ही नहीं दे रहा, बल्कि लॉकडॉउन में अपने साथ रखा है. उन्हें सैलरी भी दे रहा है.

वर्तमान समय में राजधानी सहित छत्तीसगढ़ सभी जिलों में लॉकडाउन है. दो फेस के लॉक़़डाउन के बाद शर्तों के अधीन रेस्टोरेंट, डाबा को खोलने की अनुमति दी गई है. ऐसे में टपरी भी जोमेटो और स्विगी के माध्यम से घर पहुंच सेवा दे रहा है. यहां बनने वाले देशी-विदेशी पकवान कोई आम कूक नहीं बनाते बल्कि दिव्यांग लोग बनाते हैं, जिसका जायका का टेस्ट राजधानी रायपुर बड़ा चाव से चख रहा है.

आप सोच रहेगें की इसमें खास बात क्या है तो हम आपको बताते है कि जब लॉकडॉउन हुआ तो सरकारी, प्रायवेट सभी कर्यालय बंद हो गए, डाबा, रेसेटोरेंट बंद हो गए, सरकारी कर्मचारियों की वेतन नहीं रूका, प्रायेवेट सेक्टर में कुछ को वर्क्र फार्म होम मिला तो कई बेरोजगार हो गए, लेकिन टपरी में काम कर रहे दिव्यांग वर्कर घर से बेघरर हुए ना उनकी सैलरी रोकी गई, बल्कि उनको सहेज कर अपनी व्यवस्था में रखा गया है.

टफरी के संचालक इरफान अहम्मद ने कहा कि मालिक की रहम है. आज जो भी इनकी मेहनत से हूं, जब मेरो को मौका मिला तो कैसे पीछे हटता. जब 2020 में लॉकडाउऩ हुआ तो भी लगभग 16 लोगों अपने व्यवस्था में रखा उनको सैलरी दी. आज भी लॉकडॉउन है तो अपने व्यवस्था सभी लोगों को रखा हूं, उनको सैलरी इस बार आधा सैलरी दे रहा हूं, क्योकि सभी अलग-अलग जिलों से इनको छोड़ दूंगा तो बिखरने का डर है. इसलिए इनकी सेवा कर रहा हूं. कुछ दिनों से अलटरनेट इन सब से सेवा ले रहा हूं.

घर पहुंच सेवा का जो छूट मिला है, मानों मरते व्यक्ति को ऑक्सीजन दे मौत से छीन लाने जैसा है. ठीक ऐसे ही दम तोड़ते रेस्टोरेंट के लिए छूट ऑक्सीजन का काम किया है. कोरोना एडवाजरी का पालन हम सिर्फ स्विगी, जोमेटो को सर्विस देते तक नहीं रखते बल्कि अंदर कीचन में भी पूरा ख्याल रखा जाता है.

जोमेटो के लिए सर्विस देने वाले नर्सिंग साहू ने कहा कि अभी तक यहां के जायका में कोई शिकायत नहीं मिली है. यहां जो सावधानी बरती जा रही है. जो हम देख रहे लोगों के लिए नहीं मारे लिए भी सेफ है. आने जाने के दौरान खतरा तो हमें भी है, लेकिन हम पूरी सावधानी का ख्याल रखते हैं. समान लेने से पहले सैनिटाइज करते हैं. जब लोगों के घर पहुंच जाते हैं. खाना देने के बाद भी अपने हाथों को सैनिटाइज करते हैं.
राजधानी रायपुर का जहां टपरी कैफे का. जहां संचालक इरफान अहमद 22 साल के उम्र से कैफे चला रहा है. पहले मरीन ड्राईव चौपाटी में केफे खोला. वहां दिव्यांग लोगों को काम में ही नहीं रखा, बल्कि उनके काम का प्रशिक्षण दिया. उनकों समझऩे के लिए स्वयं ऑनलाइन क्लॉस से साइन लैग्वेंज सीखा. फिर क्या टपरी कैफे चल पड़ा. कुछ साल बाद शंकर नगर में टपरी का एक और बड़ा ब्रांच खोला. वहां भी प्रदेश के दिव्यांग लोगों को मैनेजर से लेकर कर्मचारी तक रखा.

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छत्तरसिंग पटेल

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