राजधानी में उमड़ी खरीददारों की भीड़,गुटखा-गुडाखू एवं सिगरेट की कालाबाजारी शुरु

रायपुर(काकाखबरीलाल)। कोरोना संकटकाल में आज किराना दुकानों को खोलने के लिए सीमित समय दिए जाने से आज किराना सामान व सब्जी खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चेम्बर के हेल्प डेस्क ने यहां पर नगर निगम प्रशासन से सिस्टम बनाने की अपील की है ताकि लोग सोशल डिस्टेंस का पालन कर सके।
राजधानी में आज जिला प्रशासन ने लोगों को सुबह 7 से 10 बजे तक किराना एवं सब्जी खरीदने के लिए छूट क्या दी लोग यहां पर किराना सामान खरीदने के लिए टूट पड़े। दुकानदारों के लिए यहां पर सीमित समय दिया गया है जिसके चलते वे व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने समय बढ़ाने की मांग की है। होलसेल विक्रेता किराना सामानों की बिक्री नहीं कर रहे हैं। छोटे दुकानदार परेशान हो रहे हैं। राजधानी में आलू-प्याज की कमी हो रही है इसकी सबसे ज्यादा डिमांड है।
गुटखा-गुडाखू एवं सिगरेट की कालाबाजारी शुरु
राजधानी में आज गुटखा, गुडाखू की कालाबाजी शुरु हो गई है। गुड़ाखू सबसे ज्यादा रेट पर बिक रहा है। छोटी डिब्बी से लेकर बड़ी डिब्बी 50 से लेकर 200 रुपए तथा गुटखा 10 रुपए वाला 20 रुपए में बिक रहा है। लोग खरीदने के लिए मजबूर है। तम्बाखू की भी जबरदस्त डिमांड बनी हुई है। आलू भी महंगा होता जा रहा है। 40 रुपए से लेकर 50 रुपए तक यह बिक रहा है। हेल्प डेस्क के अश्वनी विग ने भी मिठाई दुकान खोलने की मांग की है। रक्षाबंधन का महत्वपूर्ण त्यौहार है मिठाईवाले भी परेशान हैं। व्यापारियों ने अब मुआवजा देने की मांग रखी है। सुबह से ही लोग फल, सब्जी एवं किराना सामान लेने के लिए टूट पड़े हैं। व्यापारियों के अनुसार पुलिस का डंडा हमारे ऊपर ही चलता है। पुलिस फाइन लगाने के बजाय कोई सिस्टम बनाए.
सब्जी वालों की अनियंत्रित भीड़
राजधानी में समता कॉलोनी, रामसागार पारा, डंगनिया, शीतला मंदिर, स्टेशन रोड सहित अन्य स्थानों पर सब्जी बाजार लग रहा है। सिंधी स्कूल के पास लोग बेतरतीब ढंग से बैठ रहे हैं। आज गोलबाजार, शाी बाजार, रामसागार पारा में अनाज खरीदने वालों की भारी भीड़ लगी रही। चेम्बर हेल्प डेस्क के अश्वनी विग ने बताया कि यहां पर सब्जी वाले सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं कर रहे हैं। लॉकडाउन-1 एवं 2 में यह व्यवस्था की गई थी लेकिन अब सभी सिस्टम फेल हो गए हैं। सब्जी वालों को बैठने के लिए सिस्टम बनाना चाहिए। यहां लोग भीड़ लगाए बैठे रहते हैं। बड़े शहरों की तर्ज पर सब्जीवालों के लिए सिस्टम बनाना चाहिए। आज दूध, पनीर, दही लेने के लिए लोग भटकते रहे।
























