अंबिकापुर

इस गाँव के लोग 20 किलोमीटर पैदल चलकर लाते हैं राशन स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव

अंबिकापुर (काकाखबरीलाल).सरकार ने सरकारी राशन एक रुपए किलो देने के लिए अपना पूरा तंत्र लगा रखा है, लेकिन इसके बाद भी सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लाॅक के एक पंचायत के 300 परिवारों के लिए उनके गांव राशन नहीं पहुंच रहा है। जी हां खोहिर पंचायत के लोगों को राशन लेने 20 किमी दूर महुली जाना पड़ता है। अफसरों ने 15 जून से पहले 3 माह का चावल पंचायत के एक कच्चे मकान में रखवाने के लिए भेजा था।
वहीं जिस ट्रक में चावल भेजा गया था वह रास्ते में ही फंस गया। इस पर ग्रामीणों ने 10 हजार रुपए चंदा एकत्रित किया। इसके बाद जेसीबी से ट्रक बाहर निकाला गया। तब ट्रक खराब सड़क की वजह से दो बार फंसा था। वहीं जब पंचायत तक चावल नहीं पहुंचता है तो यहां के ग्रामीण 100-100 रुपए जुटाकर ट्रैक्टर किराए से लेते हैं। जिससे चावल घर लेकर जाते हैं लेकिन कई बार खराब रास्ते मे ट्रैक्टर भी घाट होने के कारण नहीं चढ़ता है। इस पर ग्रामीण जान जोखिम में डालकर किसी तरह राशन लेकर जाते हैं। जिनके पास पैसे नहीं होते हैं वे सुबह 6 बजे घर से दोपहर का भोजन लेकर निकलते हैं। फिर तीन घंटे पैदल चलकर महुली पहुंचते हैं। 
ओड़गी ब्लाॅक का ये गांव मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। खोहिर पंचायत में लुल, भुंडा, बैजनपाठ गांव आते हैं। इन सभी गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है। बताया जाता है कि अभ्यारण्य इलाके में पंडो जाति के लोग प्राचीनकाल से ही रह रहे हैं। इसके बाद भी इन लोगों को मूलभूत सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
दुकान से चावल लेने के बाद उसे कांवर में ढोकर वापस जाते हैं। इसमें उन्हें 4 घंटे लगता है और देर शाम घर पहुंचते हैं। । ग्रामीणों ने बताया कि उनका गांव गुरुघासीदास अभ्यारण्य क्षेत्र में है। इसके कारण न तो वन विभाग उनके लिए सड़क बनाने के लिए पहल कर रहा है और न ही पंचायत या पीडब्ल्यूडी को ही अनुमति मिल रही है। जबकि अलग-अलग टोलों में बसी इस पंचायत में 600 वोटर हैं। सरपंच फुलसाय ने बताया कि उनकी पंचायत तक आने के लिए सही सड़क नहीं है। उनका घर बैजनपाठ में है, जो पंचायत का एक गांव है। वहां से उन्हें पंचायत तक पैदल आना पड़ता है। फुलसाय विशेष संरक्षित पंडो जनजाति समुदाय से हैं। उनका बेटा सरकारी स्कूल में शिक्षक है, लेकिन वह दूसरी पंचायत में पढ़ाते हैं। जबकि बैजनपाठ के पहुंचविहीन होने के कारण वहां कोई शिक्षक पढ़ाने नहीं जाता, अक्सर स्कूल बंद रहता है। बैजपाठ निवासी शिक्षक मोहर पंडो ने बताया कि वे गांव में पांचवीं तक की पढ़ाई किए। इसके बाद वे गांव से रोज सुबह 6 बजे छठवीं से दसवीं तक की पढ़ाई के लिए घर से निकल जाते थे। 4 घंटे पैदल चलकर महुली पहुंचते थे। जहां मिडिल और हाई स्कूल है। सुबह जल्दी निकलने के कारण वे रास्ते में खाने के लिए रोटी रख लेते थे उसे नाला का पानी पीकर खाते थे, तब थकान कम होती थी और स्कूल में पढ़ते थे।
सूरजपुर कलेक्टर रणवीर शर्मा ने कहा कि खोहिर में ही राशन दुकान बनवाई जाएगी और पहुंच मार्ग भी बनेगा। पहुंचविहीन होने के अभिशाप से इस इलाके को मुक्त कराया जाएगा। मैं हालात जानने के लिए खुद खोहिर जाऊंगा, लोगों की समस्याओं को दूर किया जाएगा।

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छत्तरसिंग पटेल

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