गिद्धों के इजिप्शियन वल्चर प्रजाति की संरक्षण की तैयारी…

समूचे देश में गिद्ध पक्षियों की प्रजाति संकट में है। पूरे देश में गिद्ध विलुप्ति की कगार पर हैं। अच्छी बात यह है कि इधर के कुछ सालों में धमधा ब्लाक में गिद्धों की इजिप्शियन प्रजाति अर्थात इजिप्शियन वल्चर को देखा गया है। ये बड़े पेड़ों में घोंसला बनाकर रह रहे हैं। इनकी प्रजाति के संरक्षण और संवर्धन के लिए यह अच्छा अवसर है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे और डीएफओ धम्मशील गणवीर ने आज इनकी संरक्षण की संभावनाओं पर विचार किया और उन क्षेत्रों में जहां इनकी बसाहट सबसे अधिक पाई गई है, वहां पर इनके कंजर्वेशन के लिए संरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए जगह चिन्हांकित करने का निर्णय लिया। इसके पश्चात फारेस्ट और रेवेन्यू की संयुक्त टीम ने जगह चिन्हांकन के लिए सर्वे किया है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए डीएफओ ने बताया कि यह खुशी की बात है कि इजिप्शियन वल्चर की प्रजाति हमारे यहां देखी जा रही है। यह दुर्लभ प्रजाति है और इसके संरक्षण की जरूरत है। इसके लिए एक खास क्षेत्र बना दिया जाएगा जो एक तरह से वल्चर रेस्टारेंट की तरह होगा। गिद्ध मृतभक्षी होते हैं। मृत जानवरों की लाशें यहीं लाई जाएंगी। इस क्षेत्र में ऐसे पौधे लगाये जाएंगे जो गिद्धों की बसाहट के अनुकूल होंगे। गिद्ध पीपल जैसे ऊंचे पेड़ों में बसाहट बनाते हैं। कंजर्वेशन वाले क्षेत्र में इस तरह की सारी सुविधाओं का विकास होगा जो गिद्धों की बसाहट के लिए उपयोगी होगी। उन्होंने बताया कि भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियां हैं, इनमें से इजिप्शियन वल्चर भी एक है। यह छोटे आकार के गिद्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में पहले बड़ी संख्या में गिद्ध पाये जाते थे लेकिन दशक भर से इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है। इसका कारण था डाइक्लोफेनिक औषधि जो मवेशियों को दी जाती थी। मवेशियों के मरने के बाद जब गिद्ध इनके गुर्दे खाते थे तो यह औषधि भी उनके पेट में चली जाती थी और जानलेवा होती थी। अब देश भर में इस औषधि पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन गिद्धों की प्रजाति तब तक काफी कम हो चुकी थी। अचानकपुर में भी दिखे : पक्षी विशेषज्ञ राजू वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष पाटन के अचानकपुर में भी इजिप्शियन वल्चर देखा गया था। उन्होंने बताया कि पाटन के सांकरा और बेलौदी में प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां लगभग 2 हजार माइग्रेटरी बर्ड स्पॉट किए गए हैं। 2 फरवरी को यहां वर्ल्ड वेटलैंड डे मनाया गया। इन्हें कैसे पहचानें : इनके गर्दन में सफेद बाल होते हैं। आकार थोड़ा छोटा होता है। ब्रीडिंग के वक्त इनकी गर्दन थोड़ी सी नारंगी हो जाती है।























