छत्तीसगढ़

पेश की मिसाल:दस रुपए के स्टाम्प पर लिखी देहदान की वसीयत, जीते जी किसान ने किया खुद का क्रियाकर्म

मंजिल तो तेरी यहीं थी, इतनी देर लगा दी आते- आते, क्या मिला तुझे जिंदगी से, अपनों ने ही जला दिया जाते-जाते। श्मशान घाट के बाहर यह वाक्य लिखा मिलता है। लेकिन कुछ ऐसे भी दानवीर हैं, जिन्होंने अपने जीते जी अपना शरीर ही दान कर दिया। उन्हीं में से एक महेतरू पिता स्व. मदन गायकवाड़ हैं।

72 वर्षीय महेतरू ग्राम पंचायत राम्हेपुर के आश्रित गांव चंडालपुर (बोड़ला) के रहने वाले हैं। महेतरू पेशे से किसान हैं। उन्होंने 10 रुपए के स्टाम्प में देहदान की वसीयत लिखकर समाज के लिए अनूठी मिसाल पेश की है। मृत्यु के बाद अपने देह काे मेडिकल कॉलेज रायपुर को अध्ययन के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है। देहदान की घोषणा के बाद किसान ने जीते जी खुद का क्रियाकर्म भी कर दिया है। महेतरू का मानना है कि चिकित्सा क्षेत्र के लिए मृत देह अमूल्य है। शोध और जटिल ऑपरेशन के लिए भी यह देह कई जिंदगी बचाती है। वर्ष 2014 में उन्होंने पं. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) रायपुर में नेत्रदान के साथ देहदान के लिए सहमति पत्र भरा है।

खुद ही लिया फैसला
देहदान की घोषणा से परिवार वाले थोड़ा असहज जरूर हुए, लेकिन फैसले को सभी ने सहमति दे दी है। संकल्प पत्र भरने के बाद महेतरू ने जीते जी खुद का क्रियाकर्म भी कर दिया। रीति-रिवाज के अनुसार मृत्यु के बाद होने वाले सभी कर्मकांड जैसे श्राद्ध, बरसी, गोदान और भोज आदि करा दिए हैं।

दो बेटे, चार बेटियां, सभी की शादी हो चुकी
किसान महेतरू जिले के छोटे से गांव चंडालपुर से ताल्लुक रखते हैं। गांव में उनकी 8 एकड़ जमीन है। दो बेटे हैं। बड़ा बेटा रामअवतार पेशे से शिक्षक है। वहीं छोटा बेटा रामाधार खेती का काम करते हैं। चार बेटियां हैं। सभी शादी के बाद अपने-अपने ससुराल में सुखी जीवन बिता रहे हैं।

इसलिए ऐसा किया
किसान मेहतरू गायकवाड़ का मानना हैं कि मौत के बाद वैसे भी राख हो जाना है। अपने लोग ही शव को आग देंगे। इससे अच्छा होगा कि यह शरीर किसी काम में आ जाए। दूसरों को मौत के बाद आग देते हुए देखता था, तो काफी पीड़ा होती थी। हमेशा लगता था कि शरीर के साथ कुछ ऐसा होना चाहिए, जो मरने के बाद भी किसी काम आए। इसी सोच के साथ देहदान व नेत्रदान का फैसला लिया। नेत्रदान से किसी दूसरे को आंखें मिल जाएगी। वहीं मरने के बाद पार्थिव शरीर से डॉक्टर रिसर्च व स्टडी कर सकेंगे।

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काका खबरीलाल

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