महासमुंद : फसल बीमा योजना की दावा राशि मंजूर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की दावा राशि मंजूर हो गई है। करीब 35 गांव के लिए 5.28 करोड रुपए की राशि जारी हुई है। लंबे समय से किसान फसल क्षतिपूर्ति की राशि का मांग कर रहे थे। वहीं दशहरा के पूर्व तक यदि राशि नहीं आई तो आमरण अनशन की चेतावनी भी कलेक्टर को दी थी। यही नहीं इसके पूर्व कई बार क्षतिपूर्ति की राशि लेने के लिए आंदोलन कर कलेक्टोरेट का घेराव भी किया था। लगातार आश्वासन किसानों को मिलता रहा, लेकिन राशि नहीं मिल रही थी।

इसी को देखते हुए आमरण अनशन पर जाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब राशि की मंजूरी हो गई है। सभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उनके खातों में ये राशि जमा होगी। बता दें कि महासमुंद जिले के लिए 35 गांवों के लिए राशि आई है। यह राशि 5 करोड 28 लाख 68 हजार 79 रुपए है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने संयुक्त संचालक कृषि को बांटने के लिए आदेशित किया है।
बता दें कि इस सूची में 35 गांव की राशि स्वीकृत हुई है। पिछले कई सालों से राशि की मांग कर-करके किसान थक गए थे। सबसे ज्यादा बागबाहरा ब्लॉक के किसान परेशान थे। इस क्षेत्र के आधे किसानों को क्षति पूर्ति की राशि मिली थी और आधे गांव वाले रुपए की मांग को लेकर दर-दर की ठोकरे खा रहे थे। उनकी मांगों पर विचार नहीं कर रहे थे। इसके बाद जनपद अध्यक्ष बागबाहरा स्मिता हितेश चंद्राकर ने कलेक्टोरेट का घेराव किया और 29 सितंबर को दशहरा तक राशि नहीं मिलने की बात पर आमरण अनशन की चेतावनी भी दी थी।
अनशन के 1 दिन पूर्व फसल बीमा कंपनी ने जारी की राशि
बागबाहरा जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चन्द्राकर के नेतृत्व में बागबाहरा क्षेत्र के सात गांव के किसानों ने महासमुंद जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने में धरने पर बैठ गए तब प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर राशि भुगतान करने व बीमा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने लिखित में आंदाेलनरत किसानों को पत्र दिया गया तब किसानों ने आंदोलन समाप्त किया था।
जब लिखित आश्वस्त के 15 दिन बाद भी किसानों को भुगतना करने संबंधित कोई कार्रवाई नहीं हुई तो जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चन्द्राकर ने 6 अक्टूबर से आमरण अनशन करने कलेक्टर को पुनः ज्ञापन सौंपा , जिससे शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया।




















